-पॉक्सो विशेष न्यायालय ने सोमेश यादव को दोषी ठहराया, दो धाराओं में फांसी और एक धारा में 5 वर्ष सश्रम कारावास की सजा
दुर्ग। छह वर्षीय बालिका से दुष्कर्म एवं हत्या के गंभीर मामले में दुर्ग पुलिस की त्वरित एवं वैज्ञानिक विवेचना के बाद विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव (24) को मृत्युदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने प्रकरण को ‘विरलतम से विरलतम’ श्रेणी का मानते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड एवं प्रत्येक धारा में 5-5 हजार रुपए अर्थदंड लगाया है। वहीं भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। मृत्युदंड की पुष्टि की प्रक्रिया नियमानुसार छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के समक्ष होगी।
विशेष दाण्डिक प्रकरण (पॉक्सो) क्रमांक 44/2025 में अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी, विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने 10 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। दोषी सोमेश यादव निवासी ओम नगर, उरला, वार्ड क्रमांक 58, थाना मोहन नगर, जिला दुर्ग का रहने वाला है।
-सूचना मिलते ही शुरू हुई बालिका की तलाश
थाना मोहन नगर क्षेत्र में 6 अप्रैल 2025 को 6 वर्ष 3 माह की बालिका के लापता होने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस ने बिना समय गंवाए बालिका की पतासाजी शुरू कर दी। पुलिस टीमों ने संभावित स्थानों पर तलाश के साथ उपलब्ध तकनीकी एवं मैदानी सूचनाओं के आधार पर खोजबीन की।
पतासाजी के दौरान पुलिस टीम ने बालिका को एक वाहन से बरामद किया और तत्काल चिकित्सकीय सहायता के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर शव पंचनामा, पोस्टमार्टम सहित आवश्यक वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ की।
-वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत किया मामला
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर वहां उपलब्ध भौतिक एवं जैविक साक्ष्यों का सूक्ष्मता से संकलन किया। विवेचना के दौरान मौखिक, दस्तावेजी, चिकित्सकीय, परिस्थितिजन्य, जैविक, डीएनए एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को एकत्र कर उनका वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया।
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर नजरी नक्शा तैयार किया। आरोपी की पहचान कर उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया तथा उसके मेमोरेण्डम कथन के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी एवं जप्ती की गई। आरोपी के कपड़ों एवं घटनास्थल से प्राप्त सामग्रियों को सुरक्षित कर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा गया।
मृतिका के आवश्यक जैविक नमूने, कपड़े, स्वाब, बाल, नाखून एवं अन्य संबंधित सामग्री भी विधिवत जप्त की गई। आरोपी एवं संबंधित व्यक्तियों के डीएनए परीक्षण के लिए नमूने लिए गए। घटनास्थल एवं आसपास उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज तथा डीवीआर को भी सुरक्षित कर जप्त किया गया। जप्त सामग्री को एफएसएल एवं डीएनए परीक्षण के लिए भेजकर प्राप्त वैज्ञानिक रिपोर्टों को चिकित्सकीय एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ विवेचना में शामिल किया गया।
-न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि
दुर्ग पुलिस ने विवेचना को केवल परिस्थितिजन्य तथ्यों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के साथ प्रकरण को मजबूत बनाया। सभी साक्ष्यों का विधिवत दस्तावेजीकरण कर अभियोजन के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालयीन परीक्षण के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषसिद्ध किया गया।
प्रकरण में अपराध करने के तरीके से संबंधित संवेदनशील एवं अनावश्यक विवरण बालिका की गरिमा तथा पहचान की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
-पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपए क्षतिपूर्ति
न्यायालय ने मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के अंतर्गत 7 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने का निर्देश भी दिया है। न्यायालय के आदेश के अनुसार सुनाई गई सजाएं एक साथ भुगताई जानी हैं। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में निर्धारित अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
-विशेष टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
प्रकरण की त्वरित कार्रवाई एवं प्रभावी विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष टीम गठित की गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर के नेतृत्व में थाना प्रभारी निरीक्षक शिव चंद्रा एवं विवेचक सहित थाना मोहन नगर के पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों ने बालिका की पतासाजी, घटनास्थल से साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य संकलन, आरोपी की गिरफ्तारी, एफएसएल एवं डीएनए परीक्षण तथा न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती रूपवर्षा दिल्लीवार ने प्रकरण की पैरवी की।
-बाल अपराधों की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि बच्चों से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि, गुमशुदगी अथवा अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। विशेषकर बच्चों एवं बालिकाओं की सुरक्षा के मामलों में सूचना देने में देरी न करें। समय पर मिली सूचना पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में मदद करती है।
दुर्ग पुलिस ने कहा कि महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों में त्वरित, निष्पक्ष, संवेदनशील एवं वैज्ञानिक विवेचना सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही बालिका की पहचान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उसका नाम, फोटो, पता अथवा पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
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सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
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