- रोजगार के साथ जल संरक्षण और स्थायी परिसंपत्तियों पर जोर, एसएनए से 4810.11 लाख रुपये मजदूरी का भुगतान, 866 कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति
दुर्ग। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अर्थात जी-राम-जी के तहत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के कार्यों को नई गति मिली है। योजना के अंतर्गत मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया को एसएनए (सिंगल नोडल अकाउंट) के माध्यम से समयबद्ध और पारदर्शी बनाया गया है। जिले में अब तक 4810.11 लाख रुपये की मजदूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है। यह राशि सीधे मजदूरों के बैंक अथवा डाकघर खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जा रही है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी। ग्रामीण परिवार ग्राम पंचायत के माध्यम से रोजगार की मांग कर सकते हैं तथा मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य है। मजदूरी भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक लगातार निगरानी की जा रही है।
-ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्य
जी-राम-जी के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ गांवों की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इनमें बालिका शौचालय निर्माण, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, वृक्षारोपण, कच्ची नाली निर्माण, तालाब निर्माण एवं तालाब गहरीकरण सहित जल संरक्षण और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्य शामिल हैं। इन कार्यों से एक ओर ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर गांवों में आवश्यक सुविधाओं और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी हो रहा है।
-तीनों जनपदों में एसएनए से मजदूरी भुगतान
जी-राम-जी के तहत जनपद पंचायत पाटन में 1766.72 लाख रुपये, धमधा में 1375.96 लाख रुपये और दुर्ग में 1579.60 लाख रुपये की मजदूरी राशि का भुगतान किया गया है। एसएनए के माध्यम से भुगतान होने से मजदूरों को राशि सीधे उनके खातों में प्राप्त हो रही है, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और सुविधाजनक बनी है।
-866 निर्माण कार्यों को मिली प्रशासनिक स्वीकृति
जी-राम-जी लागू होने के बाद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत जिले में 866 निर्माण कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें जनपद पंचायत दुर्ग के 210, धमधा के 353 और पाटन के 303 कार्य शामिल हैं।
-रोजगार के साथ गांवों में तैयार होंगी टिकाऊ परिसंपत्तियां
इन कार्यों का उद्देश्य केवल ग्रामीण परिवारों को मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांवों में ऐसी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना भी है, जो आने वाले वर्षों में जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में उपयोगी साबित होंगी।
तालाब निर्माण एवं गहरीकरण, नाला-नाली, डबरी और ट्रेंच जैसे कार्यों से वर्षा जल संचयन, भूजल संवर्धन और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। वहीं बालिका शौचालय, आंगनबाड़ी भवन और स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष जैसे कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सामाजिक अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी। वृक्षारोपण कार्यों से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में जिले में जी-राम-जी के कार्यों की नियमित समीक्षा एवं निगरानी की जा रही है, ताकि स्वीकृत कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूर्ण हों। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ गांवों में ऐसी परिसंपत्तियां विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिनका लाभ ग्रामीणों को लंबे समय तक मिलता रहे।
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