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न्यायिक प्रक्रिया में तकनीकी पहल : दुर्ग जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं हेतु ई-कोर्ट एवं कंप्यूटर स्किल प्रशिक्षण कार्यशाला

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दुर्ग। न्यायिक प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक सुगम बनाने की दिशा में दुर्ग जिला न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की स्टेट ज्यूडिशल अकेडमी के तत्वावधान और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग के मार्गदर्शन में, जिला न्यायालय दुर्ग में अधिवक्ताओं के लिए ई-कोर्ट प्रोग्राम एवं कंप्यूटर स्किल एन्हांसमेंट प्रोग्राम (लेवल 1 एवं 2) विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला दिनांक 29 एवं 30 सितंबर को जिला न्यायालय दुर्ग के नवीन सभागार में संपन्न हुई।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला मुख्यालय दुर्ग के अलावा तहसील न्यायालय धमधा, भिलाई-3 एवं पाटन से नामित अधिवक्ताओं ने भागीदारी की।
प्रशिक्षण का उद्देश्य ..
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य अधिवक्ताओं को न्यायालयीन कार्यप्रणाली में तकनीकी साधनों का बेहतर उपयोग सिखाना, ई-कोर्ट मैनेजमेंट, डिजिटल फाइलिंग और ऑनलाइन न्यायिक सेवाओं से जोड़ना था। इससे अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्यवाही में समय और श्रम की बचत के साथ पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने की दिशा में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में मिला प्रशिक्षण ...
प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ न्यायालय प्रबंधक ने अधिवक्ताओं को ई-फाइलिंग की प्रक्रिया और उसके लाभों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार अधिवक्ता डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर अपने कार्यों को अधिक तेज़, सटीक और पारदर्शी बना सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में ई-फाइलिंग और डिजिटल कार्यप्रणाली न्याय व्यवस्था की रीढ़ बनकर उभरेंगी। इनके जरिए मामलों का शीघ्र निपटारा, रिकॉर्ड का सुरक्षित रख-रखाव और लंबित प्रकरणों के समाधान में गति लाई जा सकेगी।
इसके अतिरिक्त, प्रकरणों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया, उसके लाभ और उपयोग की विधि से भी अधिवक्ताओं को अवगत कराया गया।
अधिवक्ताओं की प्रतिक्रिया ...
प्रशिक्षण में शामिल अधिवक्ताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस कार्यशाला से उन्हें न्यायालयीन कार्यों में तकनीक का समुचित उपयोग करना सीखने का अवसर मिला है। रोजमर्रा के कार्यों को तेजी और सरलता से निपटाने के लिए यह प्रशिक्षण अत्यंत उपयोगी साबित होगा। प्रतिभागियों ने भविष्य में भी इस प्रकार की कार्यशालाओं के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
 बता दे कि इस पहल को न्यायिक प्रक्रिया को डिजिटल और आधुनिक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। कार्यशाला ने न केवल अधिवक्ताओं को तकनीकी दृष्टि से सशक्त बनाया है बल्कि न्याय व्यवस्था को और अधिक सुलभ, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।

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