दुर्ग। प्रकृति जब रौद्र रूप धारण कर अपनी मर्यादाओं का उल्लंघन करती है, तो पलभर में संपूर्ण मानव सभ्यता को झकझोर देने की शक्ति रखती है। नेपाल में हाल ही में घटित क्रांति और उसके परिणामों ने हमें यह सोचने पर विवश किया है कि जब परिस्थितियाँ अचानक बदलती हैं, तो वर्षों में निर्मित व्यवस्थाएँ और उपलब्धियाँ भी क्षणभर में बिखर सकती हैं। ऐसे समय में भगवान महावीर के सिद्धांत और उनके द्वारा प्रदत्त जीवन-दर्शन हमें आत्मचिंतन का मार्ग दिखाते हैं।
महावीर स्वामी का दर्शन हमें सिखाता है कि शांति, सहिष्णुता, संयम और परस्पर सम्मान ही एक स्वस्थ समाज की आधारशिला हैं। उक्त बातें जयआनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में भक्तांबर संपुष्ट अनुष्ठान के समापन समारोह में नेपाल काठमांडू से आये सामाजिक कार्यकर्ता डॉ चंद्रमणि दीक्षित ने आयोजित धर्म सभा में व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा भगवान महावीर की अहिंसा केवल किसी प्राणी की हत्या न करने तक सीमित नहीं है। वास्तविक अहिंसा वह है, जिसमें हमारे विचारों, वाणी और व्यवहार में किसी भी जीव के प्रति हिंसा का भाव न हो। जब मनुष्य के हृदय में करुणा का संचार होता है और उसके विचारों में दूसरे के प्रति द्वेष समाप्त होने लगता है, तभी अहिंसा अपने व्यापक स्वरूप में प्रकट होती है। विचारों की अहिंसा ही अनेकांतवाद की आधारभूमि हे अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह—ये तीनों सिद्धांत आज के अशांत विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
भारत और नेपाल का संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच सदियों से आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। भगवान बुद्ध का जन्म लुंबिनी, नेपाल में हुआ था। वहीं भगवान महावीर का जन्म परंपरागत जैन मान्यता के अनुसार वैशाली गणराज्य के कुंडग्राम में हुआ था, जो वर्तमान बिहार, भारत में स्थित है। दोनों महापुरुषों की शिक्षाओं ने करुणा, संयम, आत्मशुद्धि और मानव कल्याण का संदेश हम सभी के लिए एक उदाहरण है।
आज आयोजित धर्म सभा में नेपाल काठमांडू से आए प्रमुख अतिथि डॉ चंद्रमणि दीक्षित जी का वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ परिवार की ओर से अभिनंदन किया गया।
आयंबिल महोत्सव में उत्कृष्ट योगदान देने वाले श्रीमती रैना पारख एवं आशीष रतन बोहरा का श्रमण संघ परिवार की ओर से अभिनंदन किया गया।
17 सितंबर से 29 अक्टूबर तक भक्तांबर अनुष्ठान मानव मिलन संस्थापक नेपाल केसरी राष्ट्र संत मणिभद्र मुनि जी महाराज के सानिध्य में आज समापन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। लगातार 42 दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। आज के समापन समारोह में उपस्थित गुरु भक्तों के गौतम प्रसाद जी की व्यवस्था युगराज जी नेमीचंद जी संचेती परिवार की ओर से रखी गई थी। आज अनुष्ठान के अंतिम दिवस जुगराज जी संचेती परिवार जसराज जी पारख परिवार, राकेश टीकम बाफना परिवार राजेश सुषमा कोटेचा राजेश सोनल महेता परिवार ने आज के अंतिम अनुष्ठान का लाभ लिया।
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