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दुर्ग-भिलाई
- गूगल बॉय रुद्र शर्मा की पर्यावरण संरक्षण और सीमित पटाखा प्रयोग की अपील
दुर्ग। गूगल बॉय रुद्र शर्मा का आम जनता से विनम्र निवेदन-पर्यावरण बचाएं, सीमित पटाखे चलाएं और जरूरतमंदों के जीवन में खुशियों के दिए जलाएं।
दीपावली के शुभ अवसर पर गूगल बॉय रुद्र शर्मा ने देशवासियों और आम जनता से पटाखों का सीमित मात्रा में उपयोग करने का विशेष आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि पटाखों के अत्यधिक और बेतहाशा इस्तेमाल से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण भी खतरनाक स्तर तक बढ़ रहा है।
-पर्यावरण, बुजुर्गों और मवेशियों की सुरक्षा सर्वोपरि
रुद्र शर्मा ने बताया कि जब हम सड़कों और घरों के बाहर तेज आवाज वाले पटाखे फोड़ते हैं, तो सड़क पर घूमने वाले बेजुबान मवेशी, गाय और बछड़े बुरी तरह डर जाते हैं और परेशान होते हैं। इसके साथ ही, पटाखों का धुएँदार और जहरीला प्रभाव गर्भवती माताओं, बुजुर्गों तथा सांस के मरीजों के स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर डालता है। इसलिए हम सभी नागरिकों का यह कर्तव्य है कि हम अपने पर्यावरण और समाज के हर वर्ग की सेहत का ध्यान रखें।
-"पटाखे हमारी विलासिता हैं, पर किसी जरूरतमंद की आवश्यकता"
फिजूलखर्ची पर प्रहार करते हुए गूगल बॉय रुद्र शर्मा ने कहा, "पटाखों पर ज्यादा पैसे खर्च करना एक तरह से अपने पैसों को ही जलाने जैसा है। पटाखा खरीदना हमारी विलासिता हो सकता है, लेकिन वही पैसे किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति के लिए जीवन की बुनियादी आवश्यकता हो सकते हैं। पटाखों से हमें जो क्षणिक खुशी मिलती है, उससे कहीं अधिक और स्थायी खुशी हमें तब मिलेगी जब हम उन पैसों से किसी असहाय व्यक्ति की मदद करेंगे।"
उन्होंने आह्वान किया कि हम अपने घरों में तो दिए जलाएं ही, साथ ही पटाखों के पैसे बचाकर किसी गरीब परिवार के घर भी दिए, मिठाई और लाई-बताशे बांटकर उनकी दीपावली को रोशन करें।
दिवाली और पटाखों का कोई प्राचीन संबंध नहीं:
ऐतिहासिक तथ्य: अपनी माता श्री के साथ किए गए एक रोचक विचार-विमर्श और रिसर्च का उल्लेख करते हुए रुद्र शर्मा ने बताया, "जब मैंने अपनी माता श्री से पूछा कि दीपावली और पटाखों का क्या संबंध है और पटाखों का आविष्कार कब हुआ, तो उन्होंने बताया कि पटाखों का चलन 15वीं शताब्दी के आसपास शुरू हुआ। जबकि हम दीपावली का यह पावन पर्व त्रेता युग से, यानी हजारों सालों से मनाते आ रहे हैं। स्पष्ट है कि पटाखों और दीपावली का आपस में कोई पारंपरिक संबंध नहीं है। फिर भी न जाने क्यों लोग पटाखों को दिवाली से जोड़कर देखते हैं।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हमें अपने पर्यावरण को सुरक्षित रखना है, तो हम नागरिकों को पटाखों के उपयोग पर लगाम लगानी ही होगी।
बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा निर्देश
गूगल बॉय रुद्र शर्मा ने बच्चों से भी खास अपील की कि यदि वे पटाखे जलाते भी हैं:
हमेशा सीमित मात्रा में ही पटाखे जलाएं।
पटाखे हमेशा माता-पिता या बड़ों की देखरेख (निगरानी) में ही फोड़ें।
कभी भी हाथ में लेकर पटाखे न जलाएं।
पटाखा फोड़ने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोकर ही किसी खाद्य सामग्री का सेवन करें।
संपादक- पवन देवांगन
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