-राजस्व विभाग में आदेश के बाद भी नहीं हो पाया दानपत्र की जमीन का प्रमाणीकरण
-बैंक अधिकारी और पटवारी की भूमिका पर उठाए सवाल
बेमेतरा। प्रदेश सरकार सुशासन के माध्यम से आम लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण करने का दावा कर रही है, लेकिन बेमेतरा जिले के देवकर तहसील क्षेत्र में सामने आया एक मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। धमधा क्षेत्र के शिक्षक कृष्णा कुमार वर्मा अपनी पुत्री पूनम जंघेल के हक की जमीन के प्रमाणीकरण के लिए कई वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इसी दौरान वे स्वयं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि राजस्व अधिकारियों की प्रक्रिया और लगातार लंबित मामले के कारण उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब उन्होंने 13 सितंबर को बेमेतरा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आगमन के दौरान अपनी पुत्री के साथ पहुंचकर न्याय की फरियाद रखने की बात कही है।
शिकायत के अनुसार, पूनम जंघेल को उसकी सास द्वारा रजिस्टर्ड दानपत्र के माध्यम से करीब 10 एकड़ जमीन दान में दी गई थी। दानपत्र के बाद जब जमीन के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई तो सास-ससुर की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई। मामला देवकर तहसीलदार के कार्यालय में लंबित रहा। पूनम जंघेल के अनुसार, बाद में प्रमाणीकरण को लेकर आदेश भी पारित हुआ और इसके खिलाफ साजा एसडीएम कार्यालय में अपील की गई, जिसका भी निराकरण हो चुका है। इसके बावजूद जमीन का प्रमाणीकरण नहीं होने से उनका परिवार परेशान है।
कृष्णा कुमार वर्मा का आरोप है कि परपोड़ी में पदस्थ रहे एक बैंक अधिकारी की भूमिका भी इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। उनका कहना है कि राजस्व अधिकारियों और पटवारी स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने का लाभ उठाते हुए संबंधित जमीन को बैंक में बंधक रख दिया गया, जबकि जमीन दानपत्र के माध्यम से उनकी पुत्री के नाम की गई थी। उनका दावा है कि इसी वजह से जमीन के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई ।पूनम जंघेल इस संबंध में संभागीय राजस्व कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष भी शिकायत कर चुके हैं।
शिक्षक कृष्णा कुमार वर्मा का कहना है कि बीमारी के बावजूद वे अपनी पुत्री के अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि राजस्व विभाग में आदेश और अपील के निराकरण के बाद भी यदि आम व्यक्ति को जमीन के अधिकार के लिए वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें तो सुशासन का लाभ आखिर किस तरह आम जनता तक पहुंचेगा। उन्होंने राजस्व अधिकारियों, पटवारी और संबंधित बैंक अधिकारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराकर मामले का शीघ्र निराकरण कराने की मांग की है।
साजा अनुभाग में राजस्व मामलों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच यह मामला प्रशासन के लिए भी गंभीर चुनौती है। पूनम जंघेल का आरोप है कि राजस्व संबंधी मामलों में आम किसानों और ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से परेशान होना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि बैठकों और शिकायत निवारण की प्रक्रिया के बावजूद यदि जमीनी स्तर पर लोगों को राहत नहीं मिलती तो प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। गौरतलब है कि पूर्व में भी साजा क्षेत्र में राजस्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और शिकायतों के मामले सामने आते रहे हैं।
अब सबकी नजर 13 सितंबर को बेमेतरा में होने वाले शिक्षक सम्मान कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के संभावित आगमन पर रहेगी। कैंसर पीड़ित शिक्षक कृष्णा कुमार वर्मा अपनी पुत्री के साथ मुख्यमंत्री के समक्ष फरियाद रखते हैं और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
न्यायालय तहसील साजा जिला बेमेतरा (छ.ग.) का आदेश दिनांक01/04/2025 पारित किया गया, जिसका प्र. क्रमांक2022042311100058/अ-06
न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व साजा जिला बेमेतरा (छ.ग.) का आदेश दिनांक30/06/2026
को पारित किया गया जिसका रा प्र.क्र.
202204231100031/अ-06|
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