एक अनूठी सांस्कृतिक विरासत-"खप्पर"

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RO No.12822/158

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मुंबई । महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की जांच के मामले में राज्य सरकार को झटका लगा है। आज सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की जांच को ट्रांसफर करने के अनुरोध को खारिज कर दिया और कहा कि हम इस मामले को छुएंगे भी नहीं। राज्य सरकार ने शीर्ष न्यायालय से मामले की जांच को सीबीआई से लेकर कोर्ट की निगरानी में एसआईटी को सौंपने की मांग की थी। महाराष्ट्र सरकार ने याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि सीबीआई की जांच पक्षपातपूर्ण हो सकती है, क्योंकि राज्य के पूर्व पुलिस प्रमुख सुबोध कुमार जयसवाल जांच एजेंसी की कमान संभाल रहे हैं। खास बात है कि राज्य सरकार केंद्र पर सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी के दुरुपयोग कर मंत्रियों को निशाना बनाने के आरोप लगा चुकी है। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि जयसवाल पुलिस बोर्ड का हिस्सा थे और तबादलों और नियुक्तियों की निगरानी करते थे। साथ ही राज्य ने कहा कि अगर जयसवाल संभावित आरोपी नहीं हैं, तो उन्हें गवाह होना चाहिए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता देशमुख पर आरोप हैं कि उन्होंने राज्य के गृहमंत्री पद पर रहते हुए पुलिस तबादलों और नियुक्तियों में घूसखोरी की है। 24 अप्रैल 2021 को सीबीआई ने देशमुख और अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और आईपीसी की धारा 120बी के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुरुआती जांच के आदेश दिए थे। राज्य सरकार ने पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के संबंध में दर्ज एफआईआर के कुछ हिस्सों को चुनौती दी थी। हालांकि, इसका कोई खास परिणाम नहीं निकला। सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और एसआईटी जांच की मांग की। तब कुछ समय के लिए सीबीआई जांच पर रोक लगी, लेकिन हाईकोर्ट ने बाद में याचिका खारिज कर दी थी।