अध्यक्ष विक्की सोनी ने की जम्बों कार्यकारिणी घोषित, आशुतोष तिवारी बनाए गए रिसाली मंडल भाजयुमों महामंत्री

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दक्षिणापथ, धमतरी। आप यह जानकर आश्चर्य हो जाएंगे कि यह किसी धार्मिक आयोजन का पंडाल नहीं इस पंडाल में सभी-जाति,धर्म, समुदाय के लोग शामिल हैं। ऊंच-नीच का भेद को ठेंगा दिखाता यह पंडाल महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत कार्य करने वाले छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों का है। अगर आपके गांव या नगर के आसपास से मनरेगा कर्मचारियों द्वारा शुरू की गई दांडी यात्रा गुजर रही हो तो आपको एक बार कुछ समय के लिए इससे जरूर जोड़ना चाहिए ताकि आप महसूस कर सकें की गांधी जी से आम जनमानस कैसे जुड़ जाया करते थे यात्रा में शामिल लोग बताते हैं कि हमने इस यात्रा में शामिल होकर अपना जीवन धन्य कर लिया है। आज के दौर में इतना भाईचारा, सहयोग का हम कल्पना भी नहीं किए थे वाकई में यह जीवन के यादगार पल है , जिसे हम सदा अपने ह्रदय मैं सहेज कर रखना चाहेंगे। छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के तत्वाधान में 4 अप्रैल 2022 से यह कर्मचारी निरंतर हड़ताल पर है 12 अप्रैल से मां दंतेश्वरी के प्रांगण दंतेवाड़ा से रायपुर तक 390 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने का संकल्प लेकर 40 डिग्री तापमान में निकले यह कर्मचारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को अपना आदर्श मानते हुए दांडी यात्रा कर रहे हैं । इनकी दांडी यात्रा के 12 दिन पूर्ण हो चुके हैं जिसमें उन्होंने अब तक कुल 325 किलोमीटर की यात्रा पैदल चलकर धमतरी जिले के ग्राम पंचायत कंडेल पहुंचे हैं । जी हां यह वही कंडेल ग्राम है जहां बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के नेतृत्व में नहर सत्याग्रह के समर्थन में २१ दिसंबर १९२० को महात्मा गांधी छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर पर कदम रखकर छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय चेतना की अलख जगाई। यह तस्वीर बता रही है कि छत्तीसगढ़ में गांधी जी के विचार वर्तमान दौर में भी कितने जन-जन के हृदय और छत्तीसगढ़ की माटी के कण-कण में दिव्यमान हैं। गांधी जी ने नमक कानून के विरोध में दांडी यात्रा निकाली थी, यह मनरेगा कर्मचारी भी विगत 15 वर्षों से संविदा में कार्य कर रहे हैं । प्रतिवर्ष इनकी कार्य का आकलन के आधार पर सेवावृद्धि का प्रावधान है, प्रतिवर्ष इनको अपनी नौकरी खो जाने का डर लगा रहता है। इनका कहना है कि दांडी यात्रा इसी भय से मुक्ति का आंदोलन है, संविदा प्रथा का अंत होना चाहिए । इसी लक्ष्य को लेकर हम गांधी जी के पद चिन्हों पर चलकर दांडी मार्च शांतिपूर्ण तरीके से कर रहे हैं ताकि हमारी आवाज शासन -प्रशासन तक पहुंचा सके। 78 लोगों की टीम बनाकर दंतेवाड़ा से शुरू की गई यात्रा अब धीरे-धीरे जनसैलाब में बदल रही है, जिस जिले से यह यात्रा गुजर रही है उस जिले के मनरेगाकर्मी इस यात्रा से जुड़ते जा रहे हैं, उनका स्वागत कर रहे हैं, दंडवत प्रणाम कर रहे हैं । पंचायत के जनप्रतिनिधि शीतल पेय, शरबत, नाश्ता और खाने की व्यवस्था कर रहे हैं । इस यात्रा से 28 जिलों के संविदाकर्मियों को यह विश्वास हो चला है कि हम गांधी जी की तरह ही अपने लक्ष्य को अहिंसा के मार्ग पर चलकर प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश भर के मनरेगा कर्मी दूर-दूर से ग्राम कंडेल पहुंच रहे हैं, यात्रा में शामिल हो रहे अब देखना शेष है कि जिन रास्तों पर यह चल पड़े हैं वह रास्ता उनकी मंजिल तक पहुंचता है या नहीं? शासन इस यात्रा को किस ढंग से देखता है यह देखा जाना अभी बाकी है।