दुर्ग/रिसाली। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों की अनूठी पहचान गौरी-गौरा पर्व की शुरुआत गुरुवार को नेवई भाठा वार्ड 32 में श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ हुई। नेवई भाठा स्थित गौरी-गौरा चौक में जय सेवा धुर्वे गोंड समाज द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सदियों पुरानी फूल कुचरने की परंपरा का निर्वहन किया गया। इस अवसर पर आयोजित गौरा-गौरी महोत्सव एवं सियान सम्मान समारोह में दुर्ग ग्रामीण के लोकप्रिय विधायक ललित चंद्राकर जी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस पारंपरिक रस्म में देसी अंडा और देसी मूसर का विशेष महत्व होता है। परंपरा के अनुसार पांच प्रकार के फूलों को कुचरा जाता है, जिसके बाद समाज की महिलाएं चावल अर्पित कर अपनी आस्था प्रकट करती हैं। इस दौरान महिलाओं की सामूहिक सहभागिता इस पर्व की सामाजिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाती है।
समाज की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार फूल कुचरने की रस्म ईसर राजा और गौरा-गौरी को जगाने तथा उनका आव्हान करने की परंपरा है। यह प्रक्रिया पांच दिनों तक चलती है। इसके पश्चात पांच दिन बाद ईसर राजा एवं गौरा-गौरी की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी।
इस अवसर पर विधायक ललित चंद्राकर ने समाज के सियानों का सम्मान किया और कहा कि गौरी-गौरा पर्व छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नेवई भाठा में जय सेवा धुर्वे गोंड समाज द्वारा इस परंपरा को निभाना अपनी सांस्कृतिक विरासत, पूर्वजों की मान्यताओं और सामाजिक एकजुटता को सहेजने का संदेश देता है। आधुनिक दौर में भी ऐसी परंपराओं का जीवंत रहना ग्रामीण संस्कृति की मजबूत पहचान है। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजन, सियान, महिला-पुरुष एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
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