-दुर्ग के विभिन्न विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, बाल विवाह, बाल शोषण और साइबर खतरों से बचाव के बताए उपाय
दुर्ग। बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, बाल शोषण एवं बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने और इंटरनेट की दुनिया में मौजूद खतरों के प्रति सतर्क बनाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित कर विद्यार्थियों को कानून, व्यक्तिगत सुरक्षा और सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
अभियान का मूल संदेश है— “हर बच्चे का बचपन, हम सबकी जिम्मेदारी।” इसके माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि उनकी सुरक्षा, गरिमा और सम्मान महत्वपूर्ण हैं तथा किसी भी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहने के बजाय आवाज उठाना और सहायता मांगना उनका अधिकार है।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार आयोजित इन कार्यक्रमों का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के समन्वय से जिले के विद्यालयों में जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
-सात विद्यालयों में आयोजित हुए जागरूकता शिविर
अभियान के तहत चंद्रशेखर हायर सेकेंडरी स्कूल दुर्ग, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी/अंग्रेजी माध्यम विद्यालय दीपक नगर, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोसानगर भिलाई, शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय महमरा, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बिरझापुर, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चंदखुरी तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला उतई क्रमांक-2 में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए।
इन शिविरों में न्यायिक अधिकारियों भानू प्रताप सिंह त्यागी, श्रीमती कामिनी जायसवाल, श्रीमती ऐश्वर्या दीवान, श्रीमती प्रज्ञा अग्रवाल, शाश्वत दुबे, श्रीमती अंजली सिंह, श्रीमती महिमा शर्मा, कु. आरती ध्रुव, कु. आकांक्षा सिंह, राहुल सोरी, पंकज शर्मा और कु. मुस्कान शर्मा ने सहभागिता की। पैनल अधिवक्ताओं, साइबर क्राइम अधिकारी तथा पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने भी बच्चों को कानूनी प्रावधानों और सुरक्षा संबंधी उपायों की जानकारी देने में योगदान दिया।
-छह विषयों के माध्यम से अधिकारों की पहचान
अभियान की थीम “जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार” निर्धारित की गई है। इसके अंतर्गत छह प्रमुख विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों को जागरूक किया जा रहा है। इनमें ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’, ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’, ‘सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन’, ‘बोलो, बताओ, बचाओ’, ‘ना बाल विवाह, ना बाल शोषण’ तथा ‘जागरूक बचपन, सशक्त भारत’ शामिल हैं।
इन विषयों के जरिए बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग, अनुचित व्यवहार की पहचान और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में बताया जा रहा है। साथ ही उन्हें यह भी समझाया जा रहा है कि किसी असुरक्षित परिस्थिति का सामना करने पर विश्वसनीय व्यक्ति, संबंधित अधिकारी अथवा सक्षम संस्था से सहायता प्राप्त की जा सकती है।
-साइबर सुरक्षा और बाल शोषण से बचाव पर जोर
वर्तमान समय में इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ने के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय बन गया है। अभियान के तहत विद्यार्थियों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, ऑनलाइन जोखिमों के प्रति सतर्कता तथा किसी संदिग्ध या अनुचित गतिविधि की स्थिति में सहायता लेने के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
इसके साथ ही बाल विवाह और बाल शोषण जैसी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। बच्चों को बताया जा रहा है कि उनकी सुरक्षा और सम्मान से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहने के बजाय उचित माध्यम से शिकायत करना और सहायता मांगना जरूरी है।
-जागरूकता से बढ़ेगा बच्चों का आत्मविश्वास
अभियान के माध्यम से बच्चों को निःशुल्क विधिक सहायता तथा बाल संरक्षण से जुड़ी उपलब्ध सहायता व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों में अपने अधिकारों के प्रति समझ विकसित करना और जरूरत पड़ने पर बिना भय के अपनी बात रखने का आत्मविश्वास पैदा करना है।
अभियान का प्रथम चरण दुर्ग जिले के अधिकाधिक विद्यालयों तक पहुंचने तथा विद्यार्थियों को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने पर केंद्रित है। इस पहल में परिवार, विद्यालय और समाज की साझा जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया गया है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।
सुरक्षित बचपन अभियान का संदेश स्पष्ट है कि बच्चे केवल देश का भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की अनमोल जिम्मेदारी हैं।* उनके अधिकारों की रक्षा, उनकी आवाज को महत्व देना और उन्हें भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना समाज के प्रत्येक वर्ग का दायित्व है। जब बच्चे अपने अधिकारों को पहचानेंगे और जरूरत पड़ने पर सहायता मांगने का साहस जुटाएंगे, तभी जागरूकता वास्तविक सुरक्षा में बदल सकेगी।
संपादक- पवन देवांगन
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