दुर्ग। दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में गरीबों के हक पर डाका डालने और प्रशासनिक नाकामी को लेकर निगम प्रशासन की बदहाल कार्यप्रणाली पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है।उन्होंने आरोप लगाया कि 'मोर मकान मोर आस' घटक के तहत गरीब परिवारों से अंशदान की राशि जमा कराने के बावजूद वर्षों से उन्हें मकानों का पजेशन नहीं दिया गया है,जो सीधे तौर पर गरीबों के साथ क्रूर मजाक है।डॉ. प्रतीक उमरे ने बताया कि पोटिया और बोरसी बेल्ट में गरीबों के लिए बहुमंजिला इमारतों का निर्माण तो कर दिया गया,लेकिन नगर निगम की घोर लापरवाही के कारण वहां आज तक बिजली कनेक्शन, पेयजल (ओवरहेड टैंक) और पहुंच मार्ग जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं की जा सकीं।नतीजा यह है कि सालों से खाली पड़े ये सरकारी आवास अब खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। खिड़कियां, दरवाजे और बिजली के तार चोरी हो चुके हैं और यह परिसर असामाजिक तत्वों एवं नशाखोरों का सुरक्षित अड्डा बन चुका है।उन्होंने सवाल उठाया कि जिन गरीब परिवारों ने अपने पेट काटकर ₹75,000 की गाढ़ी कमाई निगम के खाते में जमा की थी, वे आज भी झुग्गियों में या भारी-भरकम किराया देकर रहने को मजबूर हैं। निगम प्रशासन केवल दावा-आपत्ति मंगाने का ढोंग कर समय काट रहा है, जबकि धरातल पर आवंटन की कोई ठोस नियमावली लागू नहीं की जा रही है।डॉ. प्रतीक उमरे ने प्रशासनिक पक्षपात पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ नियमों को ताक पर रखकर ₹3 लाख से अधिक आय वालों और बिना जमीन वाले अपात्र लोगों को करोड़ों का फर्जीवाड़ा करते हुए आवास बांट दिए गए।वहीं दूसरी तरफ प्रशासन अपनी कमियों को छुपाने के लिए उन गरीब ग्रामीणों और शहरी हितग्राहियों पर एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दे रहा है जो किन्हीं प्रशासनिक व आर्थिक कारणों से निर्माण पूरा नहीं कर पाए हैं।
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