होम / दुर्ग-भिलाई / पितृपक्ष में जन समर्पण सेवा संस्था की अनूठी पहल, जरूरतमंदों को भोजन कराकर पूर्वजों की स्मृति में सेवा
दुर्ग-भिलाई
-9 वर्ष 9 माह से बिना नागा 365 दिन जारी है निःशुल्क भोजन सेवा, पितरों की तृप्ति के लिए लोग स्वयं परोसते हैं भोजन

दुर्ग। पितृपक्ष में अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण सहित विभिन्न धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है। इसी क्रम में जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। दुर्ग में जन समर्पण सेवा संस्था पिछले 9 वर्ष 9 माह से इसी सेवा भावना को निरंतर आगे बढ़ा रही है। संस्था द्वारा गरीब, असहाय, बेसहारा, बुजुर्ग और दिव्यांगजनों को वर्ष के 365 दिन निःशुल्क भोजन कराया जाता है। पितृपक्ष के दौरान इस सेवा का स्वरूप और भी विशेष हो जाता है, जब लोग अपने दिवंगत माता-पिता, बुजुर्गों और परिजनों की स्मृति में जरूरतमंदों को भोजन कराने के लिए संस्था से जुड़ते हैं।
जन समर्पण सेवा संस्था दुर्ग में सेवा और जरूरतमंदों की मदद के लिए एक भरोसे का नाम बन चुकी है। पितृपक्ष के दौरान शहर और आसपास के क्षेत्रों से लोग संस्था के सदस्यों से संपर्क कर अपने पूर्वजों की श्राद्ध तिथि पर भोजन सेवा कराते हैं। कई लोग स्वयं परिवार सहित पहुंचकर अपने हाथों से जरूरतमंदों को भोजन परोसते हैं, जबकि कुछ लोग संस्था से संपर्क कर सहयोग राशि उपलब्ध कराते हैं और संस्था के माध्यम से भोजन सेवा करवाते हैं। एक दिन में लगभग 200 जरूरतमंदों को भोजन कराया जाता है।
संस्था द्वारा दुर्ग रेलवे स्टेशन में प्रतिदिन लगभग 100 जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा बस स्टैंड, चंडी चौक, तमेरपारा, लुचकी तालाब, पुराना बस स्टैंड, पोलसाय पारा, समृद्धि बाजार सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर फुटपाथों और झोपड़ियों में रहने वाले गरीब, असहाय और दिव्यांगजनों तक भी भोजन पहुंचाया जाता है। संस्था पिछले कई वर्षों से बिना किसी दिन नागा किए रात्रिकालीन भोजन सेवा संचालित कर रही है।
पितृपक्ष के दौरान दुर्ग रेलवे स्टेशन पर जरूरतमंदों को पत्तल में चावल, दाल, सब्जी, पूरी, मूंगदाल के बड़े, मिष्ठान और नमकीन सहित भोजन कराया जा रहा है। भोजन पाकर जरूरतमंदों के चेहरे पर खुशी दिखाई देती है। अनेक परिवार अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में स्वयं यहां पहुंचकर भोजन परोसते हैं और सेवा का पुण्य लाभ लेते हैं।
संस्था की सेवा केवल रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं है। ऐसे गरीब, बुजुर्ग, दिव्यांग और बेघर लोग जो स्वयं भोजन लेने संस्था तक नहीं पहुंच सकते, उनका सर्वे कर सूची तैयार की गई है। संस्था के स्वयंसेवक अपने वाहनों से इन जरूरतमंदों के ठिकानों तक भोजन पहुंचाते हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जीवन बिताने वाले लोगों तक भी संस्था के सदस्य पहुंचकर भोजन उपलब्ध कराते हैं।
-पितृपक्ष में भोजन के साथ जरूरतमंदों को सामग्री और बैसाखी का वितरण
इस पितृपक्ष में संस्था द्वारा भोजन सेवा के साथ जरूरतमंदों को साबुन, निरमा, तेल, बिस्किट, मिष्ठान और नमकीन आदि सामग्री का भी वितरण किया गया। वहीं फुटपाथ पर जीवन यापन करने वाले दो दिव्यांगजनों को बैसाखी प्रदान की गई। दोनों दिव्यांग बिना बैसाखी के सड़क पर घिसटकर चलने को मजबूर थे। बैसाखी मिलने के बाद अब वे अपने सहारे चलने में सक्षम होंगे।
संस्था द्वारा दुर्ग-भिलाई के विभिन्न आश्रमों में भी समय-समय पर पहुंचकर जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। आश्रमों में एक माह के उपयोग की सामग्री के रूप में तेल, साबुन, निरमा, बिस्किट, मिष्ठान और नमकीन आदि प्रदान किए जाते हैं।
-भोजन के बाद स्वच्छता का भी रखा जाता है ध्यान
जन समर्पण सेवा संस्था के सदस्य भोजन वितरण के बाद स्वयं सफाई भी करते हैं। भोजन के बाद उपयोग किए गए पत्तलों को एकत्र कर कचरा डिब्बे में डाला जाता है, ताकि सेवा स्थल पर स्वच्छता बनी रहे। संस्था का उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि सेवा के साथ स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देना भी है।
संस्था पिछले 9 वर्ष 9 माह से लगातार बिना रुके और बिना किसी दिन नागा किए सेवा कार्य में जुटी हुई है। समिति के सदस्यों के साथ समाजसेवियों और सहयोगदाताओं के योगदान से यह सेवा निरंतर चल रही है। संस्था की इस पहल से प्रेरित होकर शहर के अन्य लोग भी जरूरतमंदों की सहायता और सेवा कार्यों से जुड़ रहे हैं।
जन समर्पण सेवा संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा सहित बंटी आशीष मेश्राम, राजेंद्र ताम्रकार, सुजल शर्मा, संजय सेन, अख्तर यासनी, अर्जित शुक्ला, मृदुल गुप्ता, ददू ढीमर, हरीश ढीमर, शुभम सेन, सचिन, ईशान शर्मा एवं अन्य सदस्य प्रतिदिन सेवा कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं।
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