-पुलगांव पुलिस की प्रभावी विवेचना और अभियोजन की पैरवी से न्यायालय में दोषसिद्धि
दुर्ग। ग्राम करंजा भिलाई के बाजार चौक के पास युवक पर धारदार वस्तु से जानलेवा हमला करने के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। माननीय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, दुर्ग द्वारा 5 सितंबर 2026 को पारित निर्णय में आरोपी अमित दास मानिकपुरी और मोहन धीमर उर्फ मोन्टू को भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 सहपठित धारा 3(5) के तहत दोषसिद्ध किया गया। दोनों आरोपियों पर 1-1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 6-6 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के तहत भी दोनों आरोपियों को 1-1 माह के साधारण कारावास एवं 500-500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ भुगताई जाएंगी।
पुलिस के अनुसार 30 जून 2025 की रात करीब 11 बजे ग्राम करंजा भिलाई के बाजार चौक के पास आहत आशीष ठाकुर का आरोपियों से विवाद हुआ था। विवाद के दौरान आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज की तथा धारदार वस्तु से उसकी पीठ और कमर के महत्वपूर्ण हिस्सों पर वार किया। हमले में आहत गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलने पर थाना पुलगांव पुलिस ने तत्काल अपराध क्रमांक 247/2025 दर्ज कर विवेचना शुरू की।
विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ प्रत्यक्षदर्शी एवं संबंधित गवाहों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा चिकित्सकीय दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए गए। उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने प्रकरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक भावेश कटारे ने मामले में प्रभावी पैरवी की। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के परीक्षण के बाद दोनों आरोपियों को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई गई। प्रकरण की विवेचना निरीक्षक प्रकाशकांत द्वारा की गई।
पुलिस के मुताबिक, गंभीर अपराधों में साक्ष्य-आधारित और समयबद्ध विवेचना तथा प्रभावी अभियोजन के परिणामस्वरूप न्यायालय से लगातार दोषसिद्धि एवं सजा का क्रम जारी है। दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि विवाद की स्थिति में कानून हाथ में न लें और किसी भी हिंसक अथवा आपराधिक गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। पुलिस द्वारा प्राप्त शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए गंभीर मामलों में वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित विवेचना की जाती है।
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सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
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