
दुर्ग। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर शहर के गंजपारा स्थित श्री सत्तीचौरा मां दुर्गा मंदिर में भगवान परशुराम का प्रकटोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना, कथा वाचन और महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
समिति के मोनू शर्मा ने बताया कि मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सुनील पांडे ने प्रातः 11 बजे भगवान परशुराम की संक्षिप्त कथा का व्याख्यान किया और संगीतमय परशुराम चालीसा का पाठ कराया। इसके पश्चात दोपहर 12 बजे महाआरती की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
पंडित सुनील पांडे ने कथा के दौरान बताया कि भगवान परशुराम, ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे, जिनका जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ। उन्होंने बताया कि भगवान परशुराम को चिरंजीवी होने का वरदान प्राप्त है और उनकी पूजा से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। भगवान शिव से प्राप्त परशु (फरसा) के कारण ही वे “परशुराम” नाम से विख्यात हुए।
उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन “शस्त्र और शास्त्र” के संतुलन का प्रतीक है, जो हमें सिखाता है कि ज्ञान और शक्ति दोनों का उपयोग समाज कल्याण और अन्याय के विरोध में होना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान चारों वेदों एवं शस्त्रों की विधिवत पूजा की गई। साथ ही छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति के तहत मिट्टी के गुड्डा-गुड़िया (पुतरा-पुतरी) का विवाह भी संपन्न कराया गया, जो सुख-समृद्धि और बच्चों में संस्कारों के विकास का प्रतीक माना जाता है।
इस अवसर पर गोपाल शर्मा, नरेंद्र शर्मा, घनश्याम पंड्या, राजेंद्र शर्मा, चंदू शर्मा, प्रमोद जोशी, प्रतिभा गुप्ता, कमल शर्मा, जीतू शर्मा, राहुल शर्मा, ललित शर्मा, राजू पुरोहित, प्रशांत कश्यप सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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