-चतुर्थ अन्तर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में पढ़ा शोधपत्र, सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र प्रस्तुतिकरण पर डॉ.शर्मा सम्मानित
भिलाई। इस्पात नगरी भिलाई के साहित्य-संस्कृति मर्मज्ञ आचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा ने हाल ही में चतुर्थ अन्तर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन भोपाल में सहभागिता दी। वहां डॉ.शर्मा ने "सामाजिक समरसता के आदर्श श्री राम -वनवासी समाज के विशेष सन्दर्भ में" शीर्षक से अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। तुलसी मानस प्रतिष्ठान और रामायण केन्द्र भोपाल ने श्रीरामचन्द्र पथ गमन न्यास संस्कृति विभाग मध्य प्रदेश शासन के सहयोग से उक्त समारोह आयोजित किया गया। सम्मेलन में डॉ शर्मा के शोध-पत्र को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया। मुख्य अतिथि एवं हरियाणा और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी ने सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र प्रस्तुति हेतु आचार्य डॉ. शर्मा को सम्मान-पत्र के साथ सम्मान राशि भेंट की।
उल्लेखनीय है कि भारत के 8 राज्यों और विश्व के ब्रिटेन, अमेरिका,रूस, नार्वे,जापान, मॉरीशस एवं श्रीलंका आदि देशों के विद्वानों ने भी इस सम्मेलन में सहभागिता की। सम्मेलन में डॉ. शर्मा ने कहा कि सामाजिक समरसता,प्रेम और सद्भाव के प्रेरणा पुरुष हैं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम। रावण की मृत्यु के बाद वे विभीषण से उसके उचित अन्तिम संस्कार हेतु कहते हैं। उनके अनुसार उसकी मृत्यु के साथ ही बैर समाप्त हो गया,अब जैसा वह विभीषण के लिये है, वैसा ही उनके लिये भी है। माता शबरी से भी उन्होंने कहा था कि वे केवल भक्ति का ही नाता मानते हैं, ऊंच-नीच,अमीर-गरीब और जाति-पाँति नहीं। उन्होंने आगे कहा कि श्री राम को राज्याभिषेक की सूचना से सुख नहीं मिलता है और न ही वनवास की सूचना से दुख होता है। वे लोकाराधन और जनमत के सम्मान में सब-कुछ त्याग सकते हैं।
आचार्य डॉ.शर्मा इस के पूर्व भी देश- विदेश अनेक सफल साहित्यिक और सांस्कृतिक भ्रमण कर चुके हैं। उन्होंने भोपाल के इस समारोह में देश-विदेश के अनेक विद्वानों के साथ सहभागिता दी। इस चार दिवसीय महोत्सव के अवसर पर तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष पं.रघुनन्दन शर्मा, रामायण केन्द्र भोपाल के निदेशक डॉ राजेश श्रीवास्तव, संस्कृति विभाग मध्य प्रदेश शासन के अधिकारी गण, तुलसी मानस भारती के प्रधान सम्पादक आचार्य प्रभु दयाल मिश्र एवं सम्पादक देवेन्द्र कुमार रावत के अलावा बड़ी संख्या में साहित्य-संस्कृति और धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।
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