-मनरेगा श्रमिकों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य, दुर्ग जिले में शत-प्रतिशत सत्यापन दुर्ग। जिला दुर्ग में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) अंतर्गत पंजीकृत परिवारों के ई-केवाईसी (e-KYC) एवं आधार सत्यापन हेतु विशेष अभियान सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में शिविर आयोजित कर आधार कार्ड एवं बैंक खाते के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों का सत्यापन किया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार ब्लॉक दुर्ग की 60, ब्लॉक पाटन की 104 तथा ब्लॉक धमधा की 108 ग्राम पंचायतों में विशेष शिविर लगाए गए। अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक एवं मेट को निर्देशित किया गया कि पंचायत भवन, कार्यस्थल एवं घर-घर जाकर सभी पंजीकृत श्रमिकों का ई-केवाईसी सुनिश्चित करें।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दुर्ग, बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य मनरेगा डेटाबेस को आधार से जोड़कर फर्जी हाजिरी पर रोक लगाना एवं मजदूरी भुगतान को पूर्णतः पारदर्शी बनाना है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी पात्र श्रमिक तकनीकी कारणों से योजना से वंचित न हो।
प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि ई-केवाईसी अनिवार्य होने के पश्चात जिन श्रमिकों का आधार सत्यापन पूर्ण नहीं होगा, उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकेगी तथा मजदूरी भुगतान में बाधा उत्पन्न हो सकती है। अतः श्रमिकों से आधार कार्ड, बैंक पासबुक एवं जॉब कार्ड के साथ पंचायत अथवा ब्लॉक कार्यालय में सत्यापन कराने की अपील की गई थी।
जिले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) के माध्यम से डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है। इसके अंतर्गत कार्यस्थलों पर प्रतिदिन दो बार जियो-टैग्ड फोटो अपलोड की जाती है, जिनका मिलान ई-केवाईसी रिकॉर्ड से किया जाता है।
जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक वास्तविक एवं पात्र मजदूर को बिना किसी रुकावट के समय पर एवं पूर्ण मजदूरी प्राप्त हो तथा योजना का लाभ पारदर्शिता के साथ ग्रामीणों तक पहुँचे।
जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक वास्तविक और पात्र मजदूर को बिना किसी बाधा के समय पर और सही मजदूरी मिलती रहे, तथा योजना का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ ग्रामीणों तक पहुँचे।
-ई-केवाईसी अनिवार्य क्यों?
जिला प्रशासन द्वारा ई-केवाईसी अनिवार्य किया गया है ताकि:
मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति दर्ज हो सके
भुगतान सीधे बैंक खाते में पहुँचे
बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो अपात्र/फर्जी नाम हटाए जा सकें यदि समय पर ई-केवाईसी नहीं कराई गई, तो श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज नहीं होगी और मजदूरी भुगतान में कठिनाई आ सकती है।
-आवश्यक दस्तावेज ..
आधार कार्ड,,बैंक पासबुक, जॉब कार्ड, श्रमिकों को पंचायत भवन या ब्लॉक कार्यालय में जाकर आधार सत्यापन एवं फेस रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य किया गया है।
-पारदर्शिता हेतु डिजिटल निगरानी..
नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) के माध्यम से कार्यस्थलों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रतिदिन दो बार जियो-टैग्ड फोटो अपलोड की जाती है फोटो का मिलान ई-केवाईसी से जुड़े आधार रिकॉर्ड से किया जाता है। इससे उपस्थिति में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
संपादक- पवन देवांगन
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