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नगपुरा शिव महापुराण कथा का अंतिम दिन: कुबेर भंडारी की कृपा के संदेश के साथ हुआ पावन विराम

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दुर्ग (मोरज देशमुख)। ग्राम नगपुरा में आयोजित शिव महापुराण कथा का पाँचवें एवं अंतिम दिन अत्यंत भावुक और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। पाँच दिनों तक चली इस दिव्य कथा का विराम श्रद्धा, आस्था और महादेव की कृपा के संदेश के साथ हुआ।
अंतिम दिन की कथा में कथावाचक ने एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा—“जब कोई मेहमान घर आता है, तो वह घर के बच्चों को कुछ न कुछ देकर ही जाता है। उसी प्रकार जब शिव महापुराण कथा का विराम होता है, तो महादेव भी अपने भक्तों को खाली हाथ नहीं भेजते।”
उन्होंने बताया कि भगवान शिव कुबेर भंडारी हैं। वे अपने भक्तों को केवल धन ही नहीं, बल्कि सुख, शांति, स्वास्थ्य, सद्बुद्धि और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद देकर जाते हैं। जो भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास के साथ कथा श्रवण करता है, उसके जीवन में शिव कृपा अवश्य प्रकट होती है।
कथावाचक ने यह भी कहा कि शिव महापुराण कथा का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। शिव भक्ति मनुष्य को अहंकार, क्रोध और लोभ से मुक्त कर सेवा, करुणा और संयम के मार्ग पर ले जाती है।
अंतिम दिन हवन, पूर्णाहुति एवं महाआरती के साथ कथा का विधिवत समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर महादेव से अपने परिवार और ग्राम की सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे पंडाल में “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष गूंजते रहे।
पाँच दिनों तक चली इस शिव महापुराण कथा ने नागपुरा ग्राम को शिवमय बना दिया। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे शिव के बताए मार्ग—सत्य, सेवा और सदाचार—पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाएंगे।
शिव महापुराण कथा के दौरान कथावाचक महाराज जी ने भगवान शिव के करुणामय, सर्वस्वीकारी और रक्षक स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसार में चाहे कोई कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, यदि वह शिव पूजा करता है तो अहंकार टिक नहीं पाता। भगवान शिव सब पर भारी पड़ते हैं, फिर भी वे किसी को अपना दुश्मन नहीं मानते।
कथा में यह भावपूर्ण वाक्य गूंजा—
“शंकर को माता-पिता दोनों कहा जाता है—तुम ही माता हो, तुम ही पिता हो।”
महाराज जी ने बताया कि जो जीवन की लड़ाई में हार जाता है, टूट जाता है या निराश हो जाता है, उसका सहारा स्वयं मेरे शंभूनाथ बन जाते हैं। शिव न तो किसी से वैर रखते हैं, न भेदभाव करते हैं—वे केवल भाव देखते हैं।
कथावाचक ने कहा कि शिव पूजा मनुष्य को शक्ति के साथ संयम और करुणा भी सिखाती है। शिव भक्त दूसरों को कुचलकर आगे नहीं बढ़ता, बल्कि सभी को साथ लेकर चलता है। यही कारण है कि महादेव को भोलेनाथ कहा जाता है।
कथा के दौरान महाराज जी ने दुर्ग पुलिस की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के समय में साइबर ठगी समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है, लेकिन दुर्ग पुलिस ने सजगता, तत्परता और ईमानदार कार्यशैली से इस पर प्रभावी रोकथाम की है।
महाराज जी ने कहा—“साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई में दुर्ग पुलिस नंबर वन है, यह पूरे जिले के लिए गर्व की बात है।”
उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे साइबर अपराधों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें। कथा के इस संदेश ने यह स्पष्ट किया कि धर्म और कर्तव्य जब साथ चलते हैं, तभी समाज सुरक्षित और सशक्त बनता है।
कथा के समापन पर पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने शिव के करुणामय स्वरूप को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
कथा के इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान श्रीमती सरोज रिंगारी  एवं  भूपेद रिंगारी रहे। वहीं शिवरात्रि कथा के सफल आयोजन में मुख्य यजमान रिया लक्ष्मी साहू , लिकेश साहू, हेमंत देशमुख, बालकृष्ण निषाद एवं संदीप जैन की विशेष भूमिका रही।
कार्यक्रम को सफल बनाने में नागपुरा सरपंच सोमेश्वर यादव, सरपंच संघ अध्यक्ष  राजू यादव, श्रीमती प्रेमलता यादव, श्रीमती जूही संजय चौबे एवं प्रिया साहू (संयोजक, नगपुरा–दुर्ग) का सराहनीय सहयोग रहा। सभी ने आयोजन को सुव्यवस्थित और भव्य बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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