छत्तीसगढ़ के राजकीय वृक्ष और आदिवासी संस्कृति में देवतुल्य साल वृक्ष के नाम पर इस साल होगा इंटरनेशनल ट्राईबल फेस्टिवल का आयोजन

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दक्षिणापथ,अयोध्या (सुनील शर्मा)। राम नगरी अयोध्या में तीन परिक्रमाओं का विशेष महत्व है ।चोरासी कोसी परिक्रमा 17 अप्रैल से प्रारंभ होगी ,परिक्रमा का समापन 8 मई को होगा । यह परिक्रमा यात्रा हर वर्ष तिथि के अनुसार आरंभ की जाती है।पंचकोशी परिक्रमा, 14 कोसी परिक्रमा तथा 84 कोसी परिक्रमा का बड़ा महत्व है पिछले 2 वर्षों से देश में चल रहे कोरोना संक्रमण के कारण धर्म नगरी के परिक्रमा पर भी प्रभाव पड़ा था. शासन और प्रशासन के द्वारा साधु-संतों से निवेदन किया गया था और परिक्रमा ना करने का अपील भी कराई गई थी.। प्रशासन से मिली अनुमति के अनुसार इस वर्ष चौरासी कोस की परिक्रमा 17 अप्रैल 2022 को आरंभ होगी ।, जिसमें हिस्सा लेना के लिए 16 अप्रैल चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के तिथि पर कारसेवक पुरम अयोध्या से साधु संतों की टोली मखौड़ा पुण्यभूमि के लिए प्रस्थान करेगी और वैशाख कृष्ण प्रतिपदा तदनुसार 17 अप्रैल 2022 दिन रविवार को सुबह 6 बजे पुण्यभूमि मखौड़ा से 84 कोसी की परिक्रमा आरंभ होगी और 8 मई 2022 रविवार को परिक्रमा यात्रा संपूर्ण होगी। पौराणिक मान्यतानुसार परिक्रमा पौराणिक ग्रंथों में पुण्यभूमि के तीर्थ का बड़ा ही महत्व बताया गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अवधपुरी धाम की 3 परिक्रमा अनंत काल से चली आ रही हैं. जिसमें 5 कोशी, 14 कोसी व 84 कोसी परिक्रमाओं का व्याख्यान है. धार्मिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अवध धाम की 84 कोसी परिक्रमा करने का अपना विशेष धार्मिक महत्व है. अवध धाम हनुमान मंडल समित के द्वारा 84 कोसी परिक्रमा करने वाले यात्रियों तथा साधु-संतों का अयोध्या धाम के कारसेवक पुरम में पंजीकरण आरंभ कर दिया गया है. 84 कोसी परिक्रमा करने के लिए पंजीकरण होना आवश्यक है. साथ ही साधु संत हनुमान मंडल समिति के द्वारा 84 कोसी परिक्रमा में हिस्सा लेते हैं. इस समूह में सबसे आगे एक विशाल ध्वज लाल रंग का चलता है जिसमें हनुमान अंकित होते हैं, यही परिक्रमा के समय 84 कोसी परिक्रमा करने वाले साधु संतों की टोली की पहचान होती है। ये है 84 कोसी परिक्रमा की मान्यता धार्मिक मान्यता है कि 84 कोसी परिक्रमा करने वाले जीव को 84 लाख योनियों के भय बंधन से मुक्ति मिल जाती है। अवध की शास्त्रीय सीमा को 84 कोसी परिक्रमा यात्रा कहा जाता है. 84 कोसी परिक्रमा करने वाले साधु संत तथा अन्य लोग पूरे दिन में केवल एक बार अनाज का सेवन करते हैं अन्य समय में फल और जूस पर निर्भर रहते हैं साथ ही उन्हें हर दिन विधि पूर्वक पूजा और स्नान करने का नियम भी है. परिक्रमा करने वाले तीर्थ यात्रियों का प्रथम प्रणव बस्ती के रामरेखा स्थित मंदिर में होता है तथा अगले दो अन्य पड़ाव बस्ती के दुबौलिया ब्लाक स्थित हनुमान बाग और अयोध्या जनपद के श्रृंगी ऋषि आश्रम में निर्धारित है। 5 जनपदों की सीमा से होकर गुजरती है परिक्रमा पथ परिक्रमा पथ 5 जनपदों की सीमा से होकर गुजरती है जिसमें बस्ती, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बाराबंकी, गोंडा के लगभग 100 से अधिक गांव से होकर गुजरती है. 84 कोसी परिक्रमा पथ पर महत्वपूर्ण पड़ाव में से महादेव घाट, भगन रामपुर, सूर्य कुंड, सीता कुंड, जन्मेजय कुंड, अमानीगंज, रुदौली, बेलखरा टिकैतनगर, दुलेरबाग, पारसपुर , उत्तर भवानी, ताराबगंज और बीयर मंदिर के आस्थान पाए जाते हैं, रामायण में इन सभी स्थानों का उल्लेख है। मखभूमि मखौड़ा धाम में चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था जिसके बाद महाराजा दशरथ को चार पुत्र की प्राप्ति हुई थी। 84 कोसी मार्ग को घोषित किया गया है राष्ट्रीय महामार्ग केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अयोध्या की 84 कोसी मार्ग को राष्ट्रीय महामार्ग घोषित किया है और इसका शिलान्यास भी कर दिया है. 3100 करोड़ रुपए की लागत से 200 किलोमीटर के निर्माण कार्य की घोषणा की गई है. पूरे प्रोजेक्ट में 4000 करोड़ रुपए खर्च होंगे 235 किलोमीटर के संपूर्ण महामार्ग को बेहद सुंदर और आकर्षण रूप देने की तैयारी है. 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के दोनों तरफ 5 मीटर चौड़े परिक्रमा पथ होंगे जिस पर हरी घास लगाई जाएगी वहीं परिक्रमा मार्ग पर 23 स्थानों पर शाकाहारी भोजनालय और विश्राम की समुचित व्यवस्था की जाएगी परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाली सरयू नदी पर दो भव्य पुलों का निर्माण भी किया जाएगा.