-निचली अदालत का दोषमुक्ति आदेश सत्र न्यायालय ने किया निरस्त, दोनों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड
दुर्ग। अवैध शराब परिवहन के मामले में दुर्ग पुलिस की ओर से प्रस्तुत अपील पर सत्र न्यायालय दुर्ग ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए निचली अदालत के दोषमुक्ति आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने प्रकरण के दो आरोपियों लखन भैंसा एवं ममता धमगाये को छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(2) के तहत दोषसिद्ध करते हुए प्रत्येक को 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर दोनों आरोपियों को छह-छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
प्रकरण के अनुसार, आरोपी लखन भैंसा उर्फ जोहरी भैंसा एवं श्रीमती ममता धमगाये के विरुद्ध अवैध शराब परिवहन के मामले में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस एवं संबंधित विभाग द्वारा शराब, परिवहन में प्रयुक्त वाहन क्रमांक CG-08-AU-0756, शराब के नमूने, स्वतंत्र साक्षियों के कथन तथा रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट सहित आवश्यक साक्ष्य संकलित कर न्यायालय में प्रस्तुत किए गए थे।
प्रकरण की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दुर्ग ने 31 जुलाई 2025 को दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था। इस निर्णय को चुनौती देते हुए राज्य की ओर से आपराधिक अपील क्रमांक 05/2026 प्रस्तुत की गई। अपील में निचली अदालत के फैसले पर पुनर्विचार करने तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषसिद्ध किए जाने का आग्रह किया गया।
अपील की सुनवाई के दौरान माननीय सत्र न्यायालय, दुर्ग ने विवेचना में संकलित साक्ष्यों, शराब की जप्ती कार्यवाही, प्रयुक्त वाहन, शराब के नमूनों एवं रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट का विस्तृत परीक्षण किया। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने 23 अक्टूबर 2026 को निचली अदालत के दोषमुक्ति आदेश को अपास्त करते हुए दोनों आरोपियों को छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(2) के तहत दोषसिद्ध घोषित किया।
-दोनों आरोपियों को सुनाई गई सजा
न्यायालय ने आरोपी लखन भैंसा उर्फ जोहरी भैंसा, उम्र लगभग 38 वर्ष, निवासी बेडगांव, जिला गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) तथा श्रीमती ममता धमगाये, उम्र लगभग 47 वर्ष, निवासी कोरची, जिला गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास एवं 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक आरोपी को छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि का लाभ नियमानुसार प्रदान करने तथा प्रकरण में प्रयुक्त वाहन के राजसात की कार्यवाही जारी रखने के निर्देश भी दिए हैं।
-विवेचक एवं आबकारी विभाग की भूमिका सराहनीय
इस प्रकरण की विवेचना एवं साक्ष्य संकलन में उपनिरीक्षक पारस सिंह ठाकुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं शराब के नमूनों का वैज्ञानिक एवं रासायनिक परीक्षण कराने तथा रिपोर्ट प्रस्तुत करने में आबकारी विभाग का सहयोग रहा। राज्य की ओर से न्यायालय में प्रभावी पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप निचली अदालत का दोषमुक्ति आदेश निरस्त हुआ और दोनों आरोपियों को सजा सुनाई गई।
-दुर्ग पुलिस की नागरिकों से अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि अवैध शराब के निर्माण, संग्रहण, बिक्री एवं परिवहन की जानकारी तत्काल पुलिस अथवा संबंधित विभाग को दें। अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस का सहयोग करें। ऐसे गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
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