दुर्ग। पिछले 20 वर्षों में देश में बड़े पैमाने पर जनसंख्या का स्थानांतरण हुआ है। लाखों नागरिकों की मृत्यु हुई है, करोड़ों लोग रोजगार और अन्य कारणों से एक राज्य से दूसरे राज्य, एक जिले से दूसरे जिले में पलायन कर गए हैं। इसके साथ ही कई स्थानों पर अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में नाम जुड़ने की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं।
भाजपा नेता अजय तिवारी ने कहा कि ऐसे में यह सुनिश्चित करना भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि मृत, स्थानांतरित और अवैध रूप से दर्ज नाम मतदाता सूची में न बने रहें। मतदाता सूची का शुद्धिकरण (SIR ) कोई राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने की अनिवार्य प्रक्रिया है।
मेरा कांग्रेस पार्टी से सवाल है कि जब आयोग मृत मतदाताओं के नाम हटाता है, तो कांग्रेस को आपत्ति क्यों होती है? जब आयोग डुप्लीकेट और स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान करता है, तो कांग्रेस को दर्द क्यों होता है? क्या कांग्रेस पार्टी पिछले 20 साल से फूली हुई, फर्जी और मृत मतदाताओं की सूची के सहारे चुनाव जीतने की आदत बना चुकी है?
एक जीवित, जागरूक और वैध मतदाता ही लोकतंत्र की असली ताकत है। फर्जी मतदाता लोकतंत्र पर बोझ हैं।
कांग्रेस का मतदाता सूची के शुद्धिकरण का विरोध यह साबित करता है कि उसे अपने जनाधार पर नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामियों पर भरोसा है। उसे डर है कि यदि सूची साफ हो गई, तो उनका तथाकथित वोट बैंक खिसक जाएगा। हम भारत निर्वाचन आयोग से मांग करते हैं कि वह बिना किसी राजनीतिक दबाव के, पूरे देश में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का कार्य तेजी से पूरा करे।और कांग्रेस से हम कहना चाहते हैं - लोकतंत्र में जीत जनता के विश्वास से मिलती है, फर्जी मतदाता सूची से नहीं।
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