-एआईसीसी ऑब्जर्वर सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त प्रेसवार्ता में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर दागे तीखे सवाल; मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और 13.3 करोड़ हटाए गए नामों की बहाली की माँग
दुर्ग। रविवार दोपहर दुर्ग में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के 'वोट बचाओ - देश बचाओ' अभियान के तहत एक विस्तृत एवं संयुक्त प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। इस प्रेसवार्ता को एआईसीसी ऑब्जर्वर एवं झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर, पीसीसी पर्यवेक्षक एवं पूर्व मंत्री रविन्द्र चौबे, पीसीसी पर्यवेक्षक सुबोध हरितवाल, आर. एन. वर्मा, दुर्ग ग्रामीण जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर, दुर्ग शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल, भिलाई नगर अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्रकार ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
प्रेसवार्ता में कांग्रेज नेताओं ने कहा कि देश में निष्पक्ष चुनाव की नींव पर हमला हो रहा है और निष्पक्ष संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली गंभीर सवालों के घेरे में है। कांग्रेस नेताओं ने अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र सरकार और भारतीय निर्वाचन आयोग को आड़े हाथों लिया।
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुवे एआईसीसी ऑब्जर्वर एवं झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा की वोट चोरी का मुद्दा केवल किसी एक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने लगातार चुनावों के दौरान मतदाता सूचियों में मनमाने ढंग से नाम जोड़ने और हटाने, दोहरा पंजीकरण करने, चुनाव आंकड़ों में अपारदर्शिता और ईवीएम व विविपैट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने लगातार पूरे साक्ष्यों के साथ देश के सामने आंकड़े रखे हैं—चाहे 7 फरवरी 2025 को महाराष्ट्र का मामला हो, 7 अगस्त 2025 को महादेवपुरा का मामला हो, सितंबर 2025 में आलंद का मुद्दा हो या नवंबर 2025 में हरियाणा से जुड़े आरोप हों। हमारे नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली की सड़कों पर उतरकर बैरिकेडिंग और पुलिस की रुकावटों के बावजूद विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन सौंपा है। हम इस लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ेंगे। "वर्ष 2023 में बने चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून ने सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले को पलट दिया जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति में शामिल किया गया था। केंद्र सरकार ने इस कानून के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश की जगह अपने कैबिनेट मंत्री को शामिल कर आयोग पर कब्जा कर लिया है। 25 सितंबर 2026 को 'द इंडियन एक्सप्रेस' की जाँच में यह उजागर हो चुका है कि खुद चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं। जब आयोग के भीतर ही फैसले बिना सर्वसम्मति और आयुक्तों की जानकारी के बिना लिए जा रहे हैं, तो यह संस्थान जनता का विश्वास खो चुका है। हमारी स्पष्ट माँग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से तत्काल इस्तीफा दें और SIR प्रक्रिया को तुरंत स्थगित किया जाए।"
पूर्व केबिनेट मंत्री रविन्द्र चौबे ने आंकड़ों का विवरण देते हुए कहा, "आंकड़े सच बोलते हैं और आंकड़े केंद्र सरकार की नीयत उजागर कर रहे हैं। बेंगलुरु सेंट्रल के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 5 प्रकार की अनियमितताओं के जरिए 1,00,250 वोट प्रभावित किए गए, जिनमें अमान्य तस्वीरें, फॉर्म 6 का दुरुपयोग और संदिग्ध प्रविष्टियाँ शामिल थीं। इसी तरह महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मात्र कुछ महीनों में अचानक 39 लाख मतदाता बढ़ गए, जबकि पिछले 5 वर्षों में केवल 32 लाख मतदाता बढ़े थे! देश भर में मतदाता सूचियों से हटाए गए 13.3 करोड़ नागरिकों के नामों को अविलंब बहाल किया जाए और सभी राजनीतिक दलों को मशीन-पठनीय डिजिटल प्रारूप में आंकड़े दिए जाएं।"
पीसीसी पर्यवेक्षक सुबोध हरितवाल ने कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा, "2023 के कानून की धारा 16 के तहत चुनाव आयुक्तों को दीवानी और आपराधिक कार्रवाई से आजीवन संरक्षण प्रदान किया गया है, जो उनकी संस्थागत जवाबदेही को पूरी तरह कमजोर करता है। हालांकि यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह संरक्षण केवल आधिकारिक कर्तव्यों के लिए है; चुनाव प्रक्रिया में जानबूझकर की गई धांधली, साजिश या आपराधिक कृत्य के लिए कोई पूर्ण छूट नहीं दी जा सकती। हमारी माँग है कि इसकी स्वतंत्र, पारदर्शी और समयबद्ध जाँच कराई जाए।"
दुर्ग ग्रामीण जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने संगठनात्मक तैयारियों की जानकारी देते हुए कहा, एआईसीसी के निर्देशानुसार 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक ग्रामीण क्षेत्रों में 'वोट रक्षक' के माध्यम से घर-घर और गाँव-गाँव में चौपालें लगाई जाएंगी। हमारी बूथ समितियां प्रभावित परिवारों, नागरिकों और जिन वैध मतदाताओं के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं, उनके साक्ष्यों का दस्तावेजीकरण करेंगी और उन्हें कानूनी सहायता प्रदान करेंगी।"
दुर्ग शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल और भिलाई नगर अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने संयुक्त रूप से कहा, "यह अभियान अब प्रेस कॉन्फ्रेंस से निकलकर देशव्यापी जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के सभी घटक दलों के साथ विशाल राष्ट्रीय रैली आयोजित होगी। इसके पश्चात 25 और 26 नवंबर को देश भर के कार्यकर्ता और प्रभावित नागरिक 'दिल्ली चलो' यात्राओं के तहत दिल्ली पहुंचेंगे। दुर्ग, भिलाई और ग्रामीण क्षेत्र से हज़ारों की संख्या में कार्यकर्ता दिल्ली के लिए कूच करेंगे।"
प्रेसवार्ता में कांग्रेसजनों ने मांग किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तत्काल अपने पद से त्यागपत्र दें।, देश भर की मतदाता सूचियों से अनुचित तरीके से हटाए गए 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम तुरंत वापस जोड़े जाएँ।, वर्तमान SIR प्रक्रिया को निलंबित कर विसंगतियों की किसी स्वतंत्र न्यायिक एजेंसी या जांच समिति से समयबद्ध जाँच कराई जाए।, निर्वाचन आयोग सभी राजनीतिक दलों को उपयोगी, खोज योग्य और मशीन-पठनीय डिजिटल प्रारूप में मतदाता सूचियों का संपूर्ण डेटा प्रदान करे।, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय निष्पक्ष चयन प्रक्रिया (CJI की उपस्थिति वाली) को पुन: बहाल किया जाए सहित विभिन्न मांग रखे।
इस दौरान आईसीसी ऑब्जर्वर एवं झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर, पूर्व कैबिनेट मंत्री रविन्द्र चौबे, पीसीसी पर्यवेक्षक सुबोध हरितवाल, आर एन वर्मा, दुर्ग ग्रामीण जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर, राजेन्द्र साहू, दुर्ग शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल, भिलाई नगर अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर सहित कांग्रेसजन मौजूद रहे ।
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