रायपुर

कीचड़ भरे रास्तों से नक्सल पीड़ितों के घर तक पहुंचे डॉ. प्रेमा साईं, बांटी मदद और जगाया भरोसा

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बीजापुर। बस्तर के घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में बारिश, कीचड़ और कठिन रास्तों के बीच मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे। उद्देश्य था—उनकी पीड़ा को करीब से समझना, उनका हालचाल जानना और जरूरत के समय उनके साथ खड़ा होना। यमपुर (पामेड़) से लेकर नेलाकांकेर तक की इस यात्रा में जहां एक ओर रास्ते की मुश्किलों ने परीक्षा ली, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवारों के चेहरों पर आई मुस्कान इस यात्रा की संवेदनशील तस्वीर बन गई।
यमपुर पहुंचने के दौरान बारिश और कीचड़ के कारण महाराज जी का काफिला मुश्किल में फंस गया। एक वाहन कीचड़ में फंस गया, जबकि काफिले की एक अन्य गाड़ी खराब हो गई। इसके बावजूद यात्रा नहीं रोकी गई। कठिन परिस्थितियों के बीच महाराज जी ग्रामीणों के बीच पहुंचे और नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले परिवारों से मुलाकात की।
-चार परिवारों तक पहुंचा सहयोग का संदेश
यमपुर और नेलाकांकेर की इस यात्रा में डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने कुल चार नक्सल पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। आर्थिक सहायता के साथ महिलाओं को साड़ी और बच्चों को कपड़े तथा शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। वहीं तिरुपति सोढ़ी की बेटी संध्या की शादी का पूरा खर्च उठाने की घोषणा ने इस यात्रा को एक अलग मानवीय आयाम दिया।
बारिश, कीचड़, खराब वाहन और दुर्गम रास्तों की चुनौतियों के बावजूद अंदरूनी गांवों तक पहुंची यह यात्रा इस बात का संदेश देती नजर आई कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को केवल राहत नहीं, बल्कि सम्मान, अपनत्व, विश्वास और भावनात्मक सहारे की भी जरूरत है।
-मोदी, शाह, साय और शर्मा को बताया ‘देव पुरुष’
ग्रामीणों से बातचीत के दौरान डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा का उल्लेख करते हुए उन्हें ‘देव पुरुष’ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से बस्तर में शांति और सामान्य जीवन की उम्मीद मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और विकास की दिशा में हो रहे प्रयासों का सबसे बड़ा लाभ यहां के आम ग्रामीणों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों तक पहुंचना चाहिए।
-यमपुर में दो परिवारों को 21-21 हजार की सहायता
ग्राम यमपुर (पामेड़) में डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने नक्सल हिंसा में वर्ष 2025 में जान गंवाने वाले सुन्नम सम्मैया और वेक्को संदीप के परिवारों से मुलाकात की। सुन्नम सम्मैया की पत्नी नर्सम्मा और उनके दो छोटे बच्चों से महाराज जी ने बातचीत कर परिवार की स्थिति जानी। वहीं वेक्को संदीप की पत्नी आरती और उनके नौ वर्षीय पुत्र से भी मुलाकात की। दोनों परिवारों की परिस्थितियों को समझने के बाद महाराज जी ने 21-21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके साथ ही महिलाओं को साड़ी और बच्चों को कपड़े, कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स व चप्पल वितरित की गई। ग्रामीणों को दिव्य कवच और भभूति भी प्रदान की गई।
-ग्रामीणों के बीच बैठकर किया भोजन
दुर्गम रास्तों की परेशानियों के बावजूद महाराज जी ने ग्रामीणों के बीच पर्याप्त समय बिताया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठकर भोजन किया और उनकी समस्याएं सुनीं। उनके इस सहज और आत्मीय व्यवहार ने ग्रामीणों के बीच अपनत्व का भाव पैदा किया। यमपुर के बाद डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ग्राम नेलाकांकेर पहुंचे। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया और बड़ी संख्या में लोगों ने उनसे आशीर्वाद लिया। यहां उन्होंने नक्सल हिंसा में वर्ष 2026 में मारे गए 40 वर्षीय तिरुपति सोढ़ी के परिवार से मुलाकात की। पत्नी शांति और पांच संतानों वाले परिवार की परिस्थितियों को जानने के बाद महाराज जी ने परिवार को 31 हजार और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
-बेटी संध्या की कन्या दान करेंगे डॉ प्रेमसाई महराज 
पीड़ित परिवार से बातचीत के दौरान डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि तिरुपति सोढ़ी की बेटी संध्या की शादी का पूरा खर्च वे स्वयं उठाएंगे और कन्यादान करेंगे। महाराज जी की इस घोषणा से परिवार के सदस्यों के साथ ग्रामीण भी भावुक हो उठे। इस पहल को आर्थिक सहायता से आगे बढ़कर एक परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने के रूप में देखा गया। नेलाकांकेर में महाराज जी ने 23 वर्षीय रवि कट्टम के परिवार से भी मुलाकात की। रवि की वर्ष 2026 में नक्सल हिंसा में मृत्यु हुई थी। वे अपने परिवार की इकलौती संतान थे। परिवार की स्थिति जानने के बाद डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने 31 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान की और भविष्य में भी यथासंभव मदद का भरोसा दिलाया।
-बच्चों के पैरों में खुद पहनाई चप्पल
नेलाकांकेर में सहायता वितरण के दौरान महाराज जी का बच्चों के प्रति आत्मीय व्यवहार भी देखने को मिला। उन्होंने बच्चों को कपड़े, स्कूल बैग, कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स और चप्पल वितरित कीं। कई बच्चों के पैरों में उन्होंने स्वयं चप्पल पहनाई। बच्चों को अपने हाथों से चप्पल पहनाते और उन्हें दुलारते देखकर ग्रामीण भावुक हो गए। बच्चों के हाथों में स्कूल सामग्री और पैरों में चप्पल देखकर परिवारों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। महिलाओं को भी साड़ी वितरित की गई।
-बोले—पीड़ित परिवारों को यह एहसास जरूरी कि वे अकेले नहीं
डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा केवल उनकी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। ऐसे परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी बात सुनना और जरूरत के समय उनके साथ खड़ा होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सहायता का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को यह विश्वास दिलाना है कि वे अकेले नहीं हैं, समाज उनके साथ खड़ा है।

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