-ग्रे-वाटर के सुरक्षित प्रबंधन की दिशा में दुर्ग जिले में जनभागीदारी की अनूठी मिसाल, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने घरों से शुरू किया बदलाव
दुर्ग। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू गंदे पानी यानी ग्रे-वाटर के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर दुर्ग जिले में जनभागीदारी आधारित अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के नेतृत्व में संचालित ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं एवं स्वच्छताग्राहियों ने श्रमदान से 3360 सोख्ता गड्ढों (सोक पिट) का निर्माण किया है।
अभियान का उद्देश्य घरों से निकलने वाले निस्तारित एवं गंदे पानी को गलियों, रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में बहने से रोकना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में गंदगी एवं जलजनित बीमारियों की रोकथाम के साथ पानी के प्राकृतिक निस्तारण और भू-जल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
-पहले खुद से शुरुआत बनी अभियान की पहचान
अभियान की सबसे खास बात यह है कि स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘नेतृत्व परिवर्तन और स्वयं से शुरुआत’ की थीम के साथ अपने घरों से पहल शुरू की। 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान को अपशिष्ट जल प्रबंधन सप्ताह के रूप में आगे बढ़ाया गया।
महिलाओं ने संकल्प लिया कि जिन घरों से निकलने वाला पानी खुले में बह रहा है, वहां सबसे पहले घर के आसपास सोख्ता गड्ढा बनाया जाएगा। इसके बाद अन्य ग्रामीण परिवारों को भी इसके लिए प्रेरित किया गया। इस पहल ने स्वच्छता के साथ महिला नेतृत्व और सामुदायिक भागीदारी का संदेश दिया है।
-श्रमदान से तैयार हो रहे सोख्ता गड्ढे
अभियान पूरी तरह जनभागीदारी और श्रमदान पर आधारित है। स्वच्छताग्राहियों और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा घरों के आसपास करीब 2 से 3 फीट गहरे गड्ढे तैयार किए जा रहे हैं। इनमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ईंट, पत्थर और कंकड़ आदि सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे घरेलू पानी जमीन में सुरक्षित रूप से सोख सके और भू-जल पुनर्भरण में मदद मिले।
-सेप्टिक टैंक के ओवरफ्लो पानी का भी होगा सुरक्षित निस्तारण
अभियान का दायरा सामान्य घरेलू ग्रे-वाटर तक ही सीमित नहीं है। जिन ग्रामीण परिवारों के घरों में सेप्टिक टैंक युक्त शौचालय हैं और टैंक के ओवरफ्लो होने के कारण गंदा पानी खुले में बह रहा था, उन्हें भी अभियान से जोड़ा गया है। ऐसे स्थानों पर विशेष सोक पिट एवं सोख्ता गड्ढों के माध्यम से पानी के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था की जा रही है।
-तकनीकी प्रशिक्षण के बाद गांवों में निर्माण
सोख्ता गड्ढों का निर्माण तकनीकी रूप से सही तरीके से सुनिश्चित करने के लिए जनपद पंचायत स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, करारोपण अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी, विकासखंड समन्वयक एवं तकनीकी सहायकों द्वारा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया गया है। गांवों के संकुल बनाकर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो अभियान की सतत निगरानी के साथ विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित कर रहे हैं।
-स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायतों में वर्मी एवं नाडेप संरचनाओं की सफाई, कचरे का पृथक्करण तथा सार्वजनिक जलस्रोतों के आसपास स्वच्छता अभियान पहले से संचालित किए जा रहे हैं। ग्रे-वाटर प्रबंधन की यह पहल इन प्रयासों को और मजबूती दे रही है।
जिला प्रशासन की पहल और स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता एवं जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। वहीं महिलाओं द्वारा श्रमदान के माध्यम से अपने घरों से बदलाव की शुरुआत करना जनभागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की प्रभावी मिसाल बनकर सामने आया है।
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