
दुर्ग। लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक रघु ठाकुर ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा कामकाजी गैर-मराठियों से मराठी भाषा ज्ञान का प्रमाण पत्र जमा करने के कथित फरमान को अनुचित और अन्यायपूर्ण करार दिया है। दुर्ग में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यह निर्णय भाषायी साम्राज्यवाद को बढ़ावा देने वाला है और भारतीय संविधान की भावना के विपरीत है।
रघु ठाकुर ने कहा कि महाराष्ट्र में छह लाख से अधिक उत्तर भारतीय परिवहन कार्य से जुड़े हैं। टैक्सी, कैब और ऑटो चालक यात्रियों से संवाद करने लायक मराठी जानते हैं, इसके बावजूद अब उनसे मराठी भाषा ज्ञान का प्रमाण पत्र मांगा जाना उनके रोजगार के लिए संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में रेहड़ी-पटरी वालों, हम्मालों, कुलियों तथा छोटे-बड़े कारोबारियों समेत करीब 90 लाख गैर-मराठी लोग रहते हैं, जिनकी रोजी-रोटी पर भाषायी कारणों से संकट मंडरा रहा है।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान’ का नारा लगाने वाली भाजपा के शासन वाले महाराष्ट्र में आज न हिंदी सुरक्षित है और न ही हिंदू। उन्होंने आरोप लगाया कि भाषाई विवाद खड़ा कर देश को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
हिंदी को पाठ्यक्रम से हटाने पर भी उठाए सवाल ..
रघु ठाकुर ने महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कहा कि त्रिभाषा फार्मूले के तहत पहले हिंदी को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी और अंग्रेजी पढ़ाई जाएगी, लेकिन हिंदी को पाठ्यक्रम से बाहर किया जा रहा है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र की सरकारी नीति त्रिभाषा फार्मूले पर आधारित है, जबकि महाराष्ट्र सरकार कथित रूप से इसे दो भाषाओं तक सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के उल्लंघन को लेकर विपक्ष शासित राज्यों के प्रति कड़ा रुख अपनाने वाली केंद्र सरकार महाराष्ट्र के मामले में शिक्षा अनुदान रोकने या उसमें कटौती करने जैसी कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण रवैया बताया।
रघु ठाकुर ने कहा कि लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महाराष्ट्र सरकार से केंद्र की शिक्षा नीति का अनुपालन कराने तथा गैर-मराठियों के साथ भाषा के नाम पर हो रहे अन्याय को रोकने की अपील की है। उन्होंने देश और छत्तीसगढ़ के बुद्धिजीवियों से हिंदी के सम्मान की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।
‘वंदे मातरम् राजनीति का शिकार’ ..
प्रेस वार्ता में वंदे मातरम् को लेकर पूछे गए सवाल पर रघु ठाकुर ने कहा कि देश में वंदे मातरम् को लेकर कहीं कोई विरोध नहीं है, बल्कि यह राजनीति का शिकार हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसे वोट हासिल करने का हथियार बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा द्वारा इसे स्वीकार किए जाने के समय किसी ने विरोध नहीं किया था, इसलिए आज इसे विवादित बनाना अर्थहीन है।
पूंजी और राजनीति के गठजोड़ पर चिंता ..
राजनीति में पूंजीपतियों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि जब-जब पूंजीपतियों ने राजनीतिक नेतृत्व पैदा किया, तब-तब आम जनता के साथ धोखा हुआ है। उन्होंने कहा कि रातों-रात नेता पैदा करने के राजनीतिक खेल के पीछे वैश्विक पूंजीवाद की भूमिका है।
उन्होंने ‘द एंड ऑफ हिस्ट्री’ और ‘क्लैश ऑफ सिविलाइजेशंस’ जैसी पुस्तकों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में समाज को विभिन्न हिस्सों में बांटने तथा लोगों का ध्यान वास्तविक और जमीनी मुद्दों से हटाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि तकनीक भी इस प्रक्रिया में सहयोग कर रही है और दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि राजनेता भी इस जाल में फंस रहे हैं।
छात्र आत्महत्याओं पर प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ में चर्चा की मांग ..
रघु ठाकुर ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से 22 छात्रों की आत्महत्या के मामले पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम में चर्चा करने की अपील की थी। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री ने इसके बजाय कार्यक्रम में गणेश जी की मूर्ति से संबंधित विषय पर बात की। उन्होंने इसे असंवेदनशीलता बताते हुए कहा कि इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी की ओर से जागरूक नागरिकों से जनहित के मुद्दों को लेकर व्यापक जनआंदोलन और अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की दशा बदलने और उसे दुर्दशा से बचाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना ही एकमात्र विकल्प है।
प्रेस वार्ता में पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष अशोक पंडा, प्रदेश महासचिव श्याम मनोहर सिंह, मजदूर नेता जावेद उस्मानी, समाजवादी नेता अशोक सिंह तथा अधिवक्ता अमनी सिंह सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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