-ब्रह्माकुमारी बहनों ने विभिन्न स्थानों पर बांधा रक्षा सूत्र, दिया परमात्म संदेश
-मन-वाणी और कर्म की पवित्रता ही सुख शांति का आधार-रीटा दीदी

दुर्ग। रक्षाबंधन केवल कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने का पर्व नहीं, बल्कि स्वयं को बुराइयों से मुक्त कर मन, वाणी और कर्म में पवित्रता धारण करने का संकल्प लेने का पावन अवसर है। इसी आध्यात्मिक संदेश के साथ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, दुर्ग द्वारा आनंद सरोवर बघेरा, राजऋषि भवन केलाबाड़ी सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर रक्षाबंधन पर्व मनाया गया।
आनंद सरोवर बघेरा में आयोजित स्नेह मिलन में जिलाधीश अभिजीत सिंह सपरिवार सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वहीं राजऋषि भवन केलाबाड़ी में दुर्ग शहर एवं ग्रामीण अंचलों से आए भाई-बहनों को ब्रह्माकुमारी रीटा दीदी एवं रुपाली दीदी ने रक्षा सूत्र बांधकर परमात्म संदेश दिया।
ब्रह्माकुमारीज दुर्ग की संचालिका रीटा दीदी ने कहा कि रक्षाबंधन हमें निराकार परमपिता परमात्मा शिव से यह प्रतिज्ञा करने की प्रेरणा देता है कि हम अपने जीवन में पवित्रता को अपनाएंगे। “पवित्रता सुख और शांति की जननी है। जब जीवन में पवित्रता थी, तब सृष्टि स्वर्ग समान सुख-शांति से भरपूर थी। आज दुख और अशांति का मूल कारण अपवित्रता है।” उन्होंने कहा कि सच्चा रक्षा सूत्र हमें अपनी कमजोरियों, विकारों और बुराइयों से स्वयं की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।

रक्षा सूत्र के साथ नशे से मुक्ति का संकल्प ..
रक्षाबंधन के अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों ने पत्रकार बंधुओ,प्रशासनिक अधिकारी गण, जज, केंद्रीय जेल, वृद्धाश्रम, बाल संप्रेषण गृह, विभिन्न पुलिस थानों, एसटीएफ दुर्ग, विज्ञान विकास केंद्र, होमगार्ड, बटालियन, रक्षित आरक्षी केंद्र, मीठालाल हॉस्टल एवं रेलवे स्टेशन पर कुली भाइयों सहित अनेक स्थानों पर पहुंचकर रक्षा सूत्र बांधा।
इस दौरान लोगों को नशे से दूर रहने तथा नशामुक्त जीवन जीने की प्रतिज्ञा भी कराई गई। बहनों ने संदेश दिया कि दूसरों की रक्षा करने से पहले हमें अपने जीवन को नशे, नकारात्मक विचारों और बुराइयों से सुरक्षित करना होगा। नशामुक्त व्यक्ति ही स्वस्थ परिवार और संस्कारवान समाज का आधार बन सकता है।. नेपाल आपदा पीड़ितों के लिए शांति की कामना .. नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रखते हुए ब्रह्माकुमारी बहनों एवं भाई-बहनों ने राजयोग मेडिटेशन द्वारा पीड़ित आत्माओं के लिए शांति, सुख एवं शक्ति के प्रकम्पन दिए। परमात्मा से प्रार्थना की गई कि सभी आत्माओं को दुख से मुक्ति मिले और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए धैर्य एवं साहस प्राप्त हो।
संपादक- पवन देवांगन
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