-डाक्टरों की कमी दूर करने कोई पहल नहीं
एक अनार और सौ बीमार वाली स्थिति
दुर्ग। संभागीय मुख्यालय दुर्ग का 500 बिस्तरों वाला जिला चिकित्सालय नाम बड़े दर्शन छोटे वाली कहावत को अक्षरशः चरितार्थ कर रहा है। यहां अत्याधुनिक मशीनों का तो टोटा बना ही हुआ है डाक्टरों की भी भारी कमी है। प्रतिदिन यहां जिले से डेढ़ से दो हजार मरीज पहुंचते हैं। ओपीडी में लंबी लाइने लगती है लेकिन डाक्टर खोजे नहीं मिलते। नतीजतन निराश मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रूख करना पड़ता है। इतने बड़े अस्पताल में मात्र 30-35 डाक्टर हैं और ये भी ड्यूटी टाइम में नदारद रहकर निजी प्रैक्टिस करते हैं। यहां भर्ती सैकड़ों मरीजों को जूनियर डाक्टरों के भरोसे छोड़ दिया गया है। उक्ताशय का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के पूर्व पार्षदों देवकुमार जंघेल, अब्दुल गनी, लिखन साहू, अमृत लोढ़ा, संजय सिंह, भोला महोबिया, मनोज चंद्राकर, मनीष यादव, डॉ. छत्रसाल गायकवाड, राजकुमार वर्मा, युवराज ठाकुर आदि ने एक विज्ञप्ति में कहा है उन्होंने जिला अस्पताल का भ्रमण कर समस्याओं का जायजा लिया और मरीजों से चर्चा की तो पता चला कि अस्पताल में डाक्टरों की भारी कमी है। एक अनार और सौ बीमार वाली स्थिति है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद लंबे समय से खाली है। जिसकी वजह से गंभीर मरीजों को अन्यत्र रेफर किया जाता है। ऐसा लगता है कि यह अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है। बताया जाता है कि जिला अस्पताल में डाक्टर आना ही नहीं चाहते क्योंकि उन्हें जितना वेतन मिलता है उससे कई गुना वे निजी प्रैक्टिस से कमा लेते हैं। डाक्टरों की कमी दूर करने राज्य सरकार को लगातार रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं लेकिन सरकार के कानों में जू़ं भी नहीं रेंग रही है। यहां पर्याप्त जांच सुविधा भी सुलभ नहीं है। मरीजों को बाहर से जांच करानी पड़ती है। आवश्यक दवाएं और इंजेक्शन भी बाहर से खरीदने पड़ते हैं। कुल मिलाकर जिला अस्पताल खुद ही विभिन्न समस्या रुपी रोगों से ग्रसित हो गया है। कांग्रेस के पूर्व पार्षदों ने मांग की है कि जिला अस्पताल में पर्याप्त डाक्टरों की तत्काल नियुक्ति की जाए और मरीजों को आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जाए।
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