-भिलाई इस्पात संयंत्र क्षेत्र की नीतियों पर जताई चिंता, संवाद से समाधान निकालने की अपील
भिलाई। भिलाई स्टील सिटी चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) की नीतियों और भिलाई इस्पात संयंत्र क्षेत्र में स्थानीय निवासियों एवं व्यापारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उद्योगों का उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय लोगों को अवसर देकर राजस्व अर्जित करना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसके साथ स्थानीय सामाजिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जहां अन्य इस्पात संयंत्रों में उत्पादन और स्थानीय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में पहल की जा रही है, वहीं भिलाई इस्पात संयंत्र क्षेत्र में रखरखाव की कमी और कुछ नीतिगत निर्णयों के कारण व्यापारियों और स्थानीय रहवासियों में असंतोष बढ़ रहा है।
ज्ञानचंद जैन ने दावा किया कि क्षेत्र के हजारों लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारी तथा रिटेंशन, लाइसेंस और हाउस लीज से जुड़े बड़ी संख्या में परिवार लंबे समय से आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई परिवार दशकों से संयंत्र और शहर के विकास से जुड़े रहे हैं तथा उन्होंने वर्षों से विभिन्न मदों में भुगतान भी किया है।
उन्होंने कहा कि यदि लंबे समय से रह रहे लोगों पर वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर अतिरिक्त आर्थिक भार डाला जाएगा तो इसका असर स्थानीय सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में व्यावहारिक समाधान और संवाद की आवश्यकता है।
चैंबर अध्यक्ष ने केंद्र सरकार, जनप्रतिनिधियों और भारतीय इस्पात प्राधिकरण के शीर्ष प्रबंधन से आग्रह किया कि संबंधित पक्षों को साथ बैठाकर चर्चा की जाए और नीतिगत विसंगतियों का समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि शहर की समस्याओं का समाधान संवाद और टेबल चर्चा के माध्यम से निकाला जा सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रभावित लोगों के प्रतिनिधियों को दिल्ली स्तर पर चर्चा के लिए अवसर दिया जाए, ताकि स्थानीय परिस्थितियों और नागरिकों की अपेक्षाओं को समझते हुए संतुलित निर्णय लिए जा सकें।
ज्ञानचंद जैन ने कहा कि उद्योग, व्यापार और स्थानीय नागरिकों के हितों में संतुलन बनाकर ही भिलाई के विकास और स्थिर सामाजिक वातावरण को मजबूत किया जा सकता है।
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