ब्रेकिंग

कोलिहापुरी की महिलाओं ने प्लास्टिक कचरे को बनाया आय का स्रोत

828250620261000331001470097.jpg

-2730 किलो प्लास्टिक रिसायकल कर अर्जित किए ₹46,410, दुर्ग मॉडल बना प्रदेश के लिए मिसाल
दुर्ग।
स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का अनूठा संगम दुर्ग जिले की ग्राम पंचायत कोलिहापुरी में देखने को मिला है। कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत कोलिहापुरी ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक ऐसा मॉडल विकसित किया है, जो अब पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।
ग्राम पंचायत की महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने घर-घर से एकत्रित किए गए 2730 किलो प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पृथक्करण कर उसे अधिकृत पुनर्चक्रण इकाई को विक्रय किया। इस पहल से समूह को कुल ₹46,410 की आय प्राप्त हुई। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि कचरे का सही प्रबंधन किया जाए तो वह केवल अपशिष्ट नहीं, बल्कि आय का सशक्त माध्यम भी बन सकता है।
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का सफल मॉडल ...
कोलिहापुरी में अपनाई गई कार्यप्रणाली त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है। ग्राम स्तर पर महिला स्व-सहायता समूह की सदस्याएं प्रतिदिन घर-घर जाकर गीला, सूखा एवं प्लास्टिक कचरे का पृथक संग्रहण करती हैं तथा ग्रामीणों को स्रोत पर ही कचरा अलग-अलग रखने के लिए जागरूक करती हैं।
विकासखंड स्तर पर संग्रहित प्लास्टिक को विकासखंड दुर्ग स्थित एमआरएफ-पीडब्ल्यूएमयू  सेंटर में पहुंचाया जाता है, जहां उसे गुणवत्ता एवं प्रकार के आधार पर PET, HDPE, LDPE सहित विभिन्न श्रेणियों में अलग किया जाता है। इससे प्लास्टिक का बाजार मूल्य बढ़ जाता है।
विक्रय स्तर पर पृथक किए गए प्लास्टिक को अधिकृत रिसायकल इकाइयों को बेचा जाता है और प्राप्त राशि सीधे महिला समूहों के खातों में जमा की जाती है, जिससे उनकी आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता में वृद्धि हो रही है।
स्वच्छ भारत मिशन और आजीविका संवर्धन की दोहरी सफलता ...
यह पहल स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्यों को साकार करने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर भी निर्मित कर रही है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अनुरूप ग्रामीणों को गीला, सूखा, घरेलू खतरनाक एवं प्लास्टिक कचरे को अलग-अलग रखने के लिए निरंतर जागरूक किया जा रहा है।
प्लास्टिक कचरे की गुणवत्ता के अनुसार पृथक्करण से मिलने वाले बेहतर मूल्य की जानकारी के बाद महिलाओं ने कचरे को अब "संपदा" के रूप में देखना शुरू कर दिया है।
अन्य ग्राम पंचायतों में भी विस्तार ...
कोलिहापुरी की सफलता से प्रेरित होकर विकासखंड धमधा की ग्राम पंचायत लिटिया तथा विकासखंड पाटन की ग्राम पंचायत पतोरा और गाड़ाडीह में भी इसी मॉडल पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी समय में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में इस मॉडल को लागू करना है।
इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने कहा, "कोलिहापुरी की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि स्वच्छता और आजीविका एक-दूसरे के पूरक हैं। सही मार्गदर्शन और सामुदायिक सहभागिता से कचरे को भी आर्थिक संसाधन में बदला जा सकता है। जिला प्रशासन ऐसे नवाचारों को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा।"
कोलिहापुरी की यह पहल न केवल स्वच्छता अभियान को नई दिशा दे रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

एक टिप्पणी छोड़ें

Data has beed successfully submit

Related News

Advertisement

ताज़ा समाचार

Popular Post

This Week
This Month
All Time

स्वामी

संपादक- पवन देवांगन 

पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)

ई - मेल :  dakshinapath@gmail.com

मो.- 9425242182, 7746042182

हमारे बारे में

हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।

सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।

logo.webp

स्वामी / संपादक- पवन देवांगन

- बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)

ई - मेल : dakshinapath@gmail.com

मो.- 9425242182, 7746042182

NEWS LETTER
Social Media

Copyright 2024-25 Dakshinapath - All Rights Reserved

Powered By Global Infotech.