-दुर्ग का नया अध्याय: विकास, विश्वास और विजन का नाम - गजेन्द्र यादव

दुर्ग ( पवन देवांगन )। किसी भी शहर का विकास केवल सड़कों, भवनों और योजनाओं से नहीं मापा जाता, बल्कि उस सोच से मापा जाता है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसरों का निर्माण करती है। दुर्ग विधानसभा में पिछले दो वर्षों के दौरान जिस तेजी से विकास कार्यों ने आकार लिया है, उसने यह साबित किया है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी हो तो बदलाव केवल वादा नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाली हकीकत बन जाता है।
छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि-विधायी मंत्री गजेन्द्र यादव के नेतृत्व में दुर्ग आज विकास के ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, रोजगार, संस्कृति और जनसुविधाओं के क्षेत्र में एक साथ काम हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार से मिली करोड़ों की स्वीकृतियों ने दुर्ग को नई दिशा और नई गति दी है। आज दुर्ग केवल एक शहर नहीं, बल्कि विकास की नई परिभाषा गढ़ता हुआ एक मॉडल बनकर उभर रहा है।

शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल, दुर्ग बनेगा ज्ञान का केंद्र ..
किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी शिक्षा होती है। यही कारण है कि मंत्री गजेन्द्र यादव ने शिक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है।
दुर्ग में 11.29 करोड़ की लागत से नालंदा परिसर बनाया जाएगा। जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को बेहतर वातावरण में पढ़ाई की पूरी सुविधा मिलेगी। जो विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का विशाल केंद्र बनेगी।

स्मार्ट स्कूल में गढ़ेंगे बच्चों का भविष्य ..
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के बेहतर भविष्य केलिए मंत्री गजेंद्र यादव ने शहर के 21 शासकीय स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने का फैसला किया है। जहां के सभी क्लास रूम बेहद हाईटेक होंगे। इनमें से 11 हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों और 10 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों का लोकार्पण हो चुका है। चार विद्यालयों में 50 लाख रुपए की लागत से भवन संधारण काम भी पूरा किया जा चुका है।

सुपर 30 की तर्ज पर तैयार होंगे बच्चे ...
दुर्ग के ऐतिहासिक जेआरडी मल्टीपरपज स्कूल को उसके मूल स्वरूप को संरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से विकसित करने की दिशा में पहल की गई है। यहां स्मार्ट क्लास, आधुनिक अधोसंरचना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुपर-30 जैसी विशेष व्यवस्था की योजना युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने वाली साबित होगा। अब युवाओं को अपने लक्ष्य को पाने के लिए हर सुविधा और संसाधन मिलेगा, वो भी फ्री में ।
आईटी पार्क: रोजगार और नवाचार का नया द्वार ...
दुर्ग के युवाओं के लिए सबसे बड़ी सौगातों में से एक है, अत्याधुनिक आईटी पार्क का लोकार्पण। यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के सपनों का मंच है। लंबे समय से युवा रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करते थे, लेकिन अब दुर्ग में ही आईटी और स्टार्टअप के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। आईटी पार्क के शुरू होने से तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और दुर्ग जिले की पहचान प्रदेश के उभरते आईटी हब के रूप में बनेगी। यह परियोजना मंत्री गजेन्द्र यादव के उस विजन को दर्शाती है जिसमें वे दुर्ग के युवाओं को अपने ही जिले में उज्ज्वल भविष्य उपलब्ध कराना चाहते हैं।

खेलों में नई क्रांति, दुर्ग बनेगा स्पोर्ट्स हब ...
दुर्ग की नई पहचान केवल शिक्षा और उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि खेलों के क्षेत्र में भी शहर तेजी से आगे बढ़ रहा है। 144.68 लाख रुपए की लागत से आधुनिक इंडोर बैडमिंटन कोर्ट का लोकार्पण किया जा चुका है। वहीं 156.68 लाख रुपये की लागत से स्विमिंग पूल की सुविधा भी शहर को मिली है। उरला में 198.39 लाख रुपये की लागत से मिनी स्टेडियम निर्माणाधीन है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रविशंकर स्टेडियम को बीसीसीआई से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है, जिससे भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल दुर्ग में होंगे।
सड़कों का जाल, ट्रैफिक से राहत और सुरक्षित आवागमन ..
बढ़ते शहर की सबसे बड़ी जरूरत होती है मजबूत और चौड़ी सड़कें। इसी सोच के साथ दुर्ग में कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिली है।
चंडी मंदिर रोड चौड़ीकरण, जेल तिराहा से मिनी माता चौक पुलगांव तक फोरलेन, महाराजा चौक से बोरसी चौक तक फोरलेन, राजेंद्र पार्क चौक से शहीद चौक होते हुए आईएमए चौक तक फोरलेन और साइंस कॉलेज जीई रोड से स्टेशन रोड निर्माण जैसी परियोजनाओं के लिए 1 अरब 5 करोड़ 76 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इसके अतिरिक्त महाराजा चौक और पोटिया चौक पर फ्लाईओवर निर्माण की स्वीकृति भी मिल चुकी है। शहर में 15 से अधिक स्थानोंa पर एप्रोच रोड निर्माण जारी है ताकि नागरिकों को हाईवे पर निर्भरता कम करनी पड़े और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो सके।

आस्था और संस्कृति का संरक्षण ...
दुर्ग की पहचान केवल विकास कार्यों से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी है। शहर के आस्था का केंद्र मां चंडी मंदिर और बैगापारा शीतला मंदिर को भव्य स्वरूप देने के लिए 1 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से विकास कार्य शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही आस्ता को ध्यान में रखते हुए शहर में धार्मिक कारीडोर बनाया जाएगा। जिससे शहर के सभी प्रमुख मंदिरों को इस कारीडोर से जोड़ा जाएगा। ऐसा प्रदेश और दुर्ग में पहली बार होगा। इसके अलावा दुर्ग की पहन रहे बैगापारा अखाड़ा के संवर्धन की दिशा में भी कार्य किए जा रहे हैं। यह प्रयास विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने का संदेश देता है।
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