-मूल्य पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर संगठन ने उठाई आवाज
दुर्ग। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत द्वारा एमआरपी (Maximum Retail Price) के नाम पर हो रहे उपभोक्ता शोषण, भ्रामक मूल्य निर्धारण, यूनिट सेल प्राइस नियमों के उल्लंघन तथा पैकेजिंग आधारित अत्यधिक वसूली के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई है। संगठन ने कहा कि एमआरपी व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ता हितों की रक्षा करना है, इसलिए मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता एवं छिपे शुल्कों पर सख्त निगरानी आवश्यक है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में संगठन ने कहा कि औषधियों, श्रृंगार प्रसाधनों, रेडीमेड वस्त्रों, पैकेज्ड खाद्य पदार्थों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मॉल, एयरपोर्ट, अस्पतालों एवं अन्य सेवा स्थलों पर एमआरपी और वास्तविक वसूली के बीच बढ़ता अंतर उपभोक्ता हितों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
संगठन ने बताया कि Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011 के अनुसार एमआरपी सभी करों सहित निर्धारित होता है। साथ ही यूनिट सेल प्राइस, नेट क्वांटिटी, निर्माता, पैकर अथवा आयातक की जानकारी तथा उपभोक्ता सहायता संबंधी विवरण स्पष्ट एवं पढ़ने योग्य रूप में प्रदर्शित करना अनिवार्य है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि hidden charges, platform fee, convenience fee, packing fee अथवा service charge के नाम पर अतिरिक्त वसूली की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे मामलों में जिला एवं राज्य प्रशासन को औचक निरीक्षण, बिल सत्यापन तथा दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। संगठन ने कहा कि एमआरपी व्यवस्था केवल पैकेट पर छपी संख्या न रहकर उपभोक्ता सुरक्षा का प्रभावी माध्यम बननी चाहिए।
इस अवसर पर रामपाल सिंह, अनुराग त्रिपाठी, आशीष गोस्वामी, वैभव तिवारी, लक्ष्मीकांत शर्मा तथा ओम प्रकाश पटेल उपस्थित रहे। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, छत्तीसगढ़ प्रांत ने अंत में कहा कि एमआरपी, यूनिट सेल प्राइस एवं प्राइस ट्रांसपेरेंसी को लेकर राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर सुधारात्मक कार्रवाई समय की मांग है। संगठन इस विषय पर जन-जागरूकता, विधिक पहल एवं प्रशासनिक संवाद आगे भी जारी रखेगा।
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