दुर्ग। देशभर में पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया है। इस मुद्दे पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार अपने चुनावी फायदे के लिए हर चीज छिपा लेती है और चुनाव खत्म होते ही जनता पर बोझ डाल देती है.वोरा ने कहा कि दो महीने चले चुनाव के दौरान लोकतंत्र पर कई सवाल उठे, सत्ता का दुरुपयोग हुआ, लेकिन तब देशभक्ति नजर नहीं आई। अब जनता को पेट्रोल बचाने और घर से काम करने की सीख देकर देशभक्ति समझाई जा रही है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पेट्रोल 103.58 रुपए प्रति लीटर और डीजल 96.57 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है, जबकि निजी कंपनी जियो ने 5 रुपए तक रेट बढ़ा दिए हैं। वोरा ने कहा कि- "दो हफ्ते पहले तक सरकार तेल के दाम बढ़ने से इनकार कर रही थी और अब जनता को धीरे-धीरे इसके लिए तैयार किया जा रहा है।20 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से एक दिन पहले रिपोर्ट आई थी कि पेट्रोल के दाम 25 से 28 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। उस समय पेट्रोलियम मंत्रालय ने ट्वीट कर इसे "फेक न्यूज" बता दिया और कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव ही नहीं है। 11 मई को फिर से संकेत मिलने लगे कि तेल के दाम बढ़ सकते हैं। पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के ठीक पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा गया कि सप्लाई पर्याप्त है और दाम बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। लेकिन मतदान खत्म होते ही कहा जाने लगा कि भविष्य में दाम बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता। जेट फ्यूल के दाम बढ़ रहे हैं, चुनाव के बाद कमर्शियल एलपीजी 93 रुपए महंगी हो गई, 5 किलो वाली एलपीजी 261 रुपए तक महंगी हो गई। अब रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि तेल कंपनियां घाटा सहन नहीं कर पा रहीं हैं।
"और तो और अब प्रधानमंत्री द्वारा जनता को पेट्रोल बचाने की सीख देकर देशभक्ति समझाई जा रही है। अगर जनता से समर्पण की अपील करनी थी तो पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान क्यों नहीं की गई, जब प्रधानमंत्री लगातार रैलियां और रोड शो कर रहे थे? अगर हर रैली में यही अपील दोहराई जाती तो शायद उसका असर भी ज्यादा होता।अगर जनता के लिए पेट्रोल बचाना देशभक्ति है तो प्रधानमंत्री खुद पेट्रोल की बचत क्यों नहीं कर रहे? अपील करने के ठीक पहले उन्होंने हैदराबाद में रोड शो किया, उसी रात जामनगर पहुंचे और वहां भी रोड शो हुआ। 11 मई को सोमनाथ में रोड शो हुआ और उसके बाद वडोदरा में भी कार्यक्रम प्रस्तावित था। प्रधानमंत्री के काफिले में 50 से 100 तक गाड़ियां रहती हैं, उनके साथ अन्य नेताओं और सुरक्षा बलों के वाहन अलग चलते हैं। यह सब भी पेट्रोल और डीजल से ही चलता है।"
उन्होंने सवाल उठाया कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर एयर शो आयोजित करने की क्या जरूरत थी? विमानों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन भी जनता के पैसों से ही आता है। जब जनता से समर्पण और देशभक्ति की अपील की जा रही है तो सरकार खुद रोड शो और एयर शो से परहेज क्यों नहीं करती?वोरा ने कहा कि देश चलाना केवल भाषणों और प्रचार का विषय नहीं है। जनता को अंधेरे में रखकर चुनाव जीतना और उसके बाद महंगाई का बोझ डाल देना सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं को साफ दिखाता है।
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