दुर्ग

महिला दिवस विशेष: तीजन बाई की आवाज से पंडवानी को मिली विश्व मंच पर पहचान

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दुर्ग (मोरज देशमुख)। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को देश और दुनिया में पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। अपनी दमदार आवाज, जीवंत अभिनय और अनोखी शैली के कारण उन्होंने पंडवानी लोकगायन को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
तीजन बाई का जन्म वर्ष 1956 में दुर्ग जिले के गनियारी गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें पंडवानी सुनने और गाने का शौक था। उनके नाना बृजलाल पारधी पंडवानी गाया करते थे, जिन्हें सुनकर ही तीजन बाई ने इस कला को सीखा।
उस समय समाज में यह धारणा थी कि पंडवानी गाना महिलाओं के लिए उचित नहीं माना जाता था। इसके बावजूद तीजन बाई ने अपने जुनून और मेहनत के बल पर इस कला को अपनाया और आगे बढ़ाया।
पंडवानी की दो प्रमुख शैलियां होती हैं – वेदमती और कपालिक। पहले महिलाएं केवल बैठकर गाए जाने वाली वेदमती शैली में ही गाती थीं, लेकिन तीजन बाई ने खड़े होकर अभिनय और संवाद के साथ गाई जाने वाली कपालिक शैली को अपनाया। यह उस समय एक बड़ा बदलाव माना गया।

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बताया जाता है कि तीजन बाई ने मात्र 13 वर्ष की उम्र में अपना पहला सार्वजनिक कार्यक्रम किया। उनकी गायकी और अभिनय शैली ने धीरे-धीरे लोगों का ध्यान आकर्षित किया और वे छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध हो गईं।
बाद में उन्हें देश और विदेश के कई बड़े मंचों पर प्रस्तुति देने का अवसर मिला। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान सहित कई देशों में उन्होंने पंडवानी की प्रस्तुति दी, जिससे छत्तीसगढ़ की लोककला को वैश्विक पहचान मिली।
उनकी कला और योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई बड़े सम्मानों से नवाजा। उन्हें 1987 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण प्रदान किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2007 में ‘नृत्य शिरोमणि’ सम्मान और 2022 में ‘IBC24 Champions of Change’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
आज भी तीजन बाई पंडवानी के माध्यम से महाभारत की कथाओं और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर तीजन बाई की कहानी यह संदेश देती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और लगन से कोई भी व्यक्ति समाज की सीमाओं को पार कर बड़ी पहचान बना सकता है। उनकी सफलता हर महिला और कलाकार के लिए एक प्रेरणा है।

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