छत्तीसगढ़

डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी करने वालों पर बस्तर पुलिस की सख्त नजर

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-स्पेशल टीम की निगरानी में अपराधी, बच पाना अब मुश्किल
-राष्ट्रीय न्यूज सर्विस की साइबर क्राइम पर विशेष रिपोर्ट
-लालच पर कंट्रोल न कर पाने के कारण लोग ठगों के जाल में फंस रहे हैं
-बुजुर्ग सबसे आसान टारगेट, लिंक और कॉल को लेकर सतर्कता बेहद जरूरी
जगदलपुर (केशव सल्होत्रा)।
शेयर ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा, नामी-गिरामी कंपनियों की फ्रेंचाइजी, बीमा रिन्यूअल के नाम पर अतिरिक्त लाभ या फिर एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक करने जैसे तरीकों से साइबर ठग लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। बस्तर संभाग में ऐसे मामलों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है।
अब साइबर अपराधियों ने अपना फोकस खास तौर पर ओल्ड एज यानी बुजुर्गों पर केंद्रित कर लिया है। वे लोग जो घर में अकेले रहते हैं, जिनके बच्चे बाहर नौकरी करते हैं या तकनीकी जानकारी सीमित है, उन्हें आसानी से टारगेट किया जा रहा है। बीमा पॉलिसी के लाप्स होने या नए फायदे दिलाने के नाम पर बड़ी रकम ठगी जा रही है।
ऐसे बनाते हैं साइबर अपराधी लोगों को शिकार ..
साइबर ठग पहले विश्वास जीतने के लिए छोटी रकम का मुनाफा दिखाते हैं। शेयर ट्रेडिंग या निवेश के नाम पर शुरुआत में कुछ पैसा वापस भी कर देते हैं, जिससे सामने वाला लालच में आ जाता है। इसके बाद बड़ी रकम इनवेस्ट करवाकर संपर्क तोड़ दिया जाता है। लालच और जल्दबाजी ही सबसे बड़ा हथियार बन रही है, जिसके चलते लोग समय रहते ठगी को समझ नहीं पाते।
2025 में हुए साइबर क्राइम के आंकड़े ..
बस्तर में साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए एसपी शलभ कुमार सिन्हा के निर्देशन में आठ सदस्यीय स्पेशल साइबर टीम गठित की गई है।
इस टीम की अगुवाई डीएसपी गीतिका साहू कर रही हैं। टीम में इंस्पेक्टर गौरव तिवारी, दिलबाग सिंह, सब इंस्पेक्टर अमित सिदार, प्रमोद ठाकुर, निलांबर नाग सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं।
वर्ष 2025 में फाइनेंशियल आईटी एक्ट एवं अन्य आईटी एक्ट के तहत 15 प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
अलग-अलग राज्यों से जुड़े 27 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
80 लाख 64 हजार 755 रुपये की रकम साइबर ठगों के खातों में जाने से पहले रोकी गई है और कई खातों को होल्ड कराया गया ।
जागरूकता अभियान से साइबर अपराध पर प्रहार ..
राष्ट्रीय न्यूज सर्विस के बस्तर रीजनल हेड केशव सल्होत्रा से चर्चा के दौरान एसपी बस्तर शलभ कुमार सिन्हा ने बताया कि साइबर क्राइम के पीछे सबसे बड़ी वजह लोगों में जागरूकता की कमी है। इसी को देखते हुए जिले भर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
स्कूल, कॉलेज, साप्ताहिक बाजारों और मोहल्लों में जाकर लोगों को साइबर ठगी के तरीकों की जानकारी दी जा रही है। विशेष रूप से बुजुर्गों के घर-घर जाकर उन्हें कॉल, लिंक और ओटीपी से जुड़े खतरों के बारे में समझाया जा रहा है।
इसके साथ ही बड़े आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साइबर टीम के जवानों को सिविल ड्रेस में तैनात किया जा रहा है ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सके।
एसपी शलभ कुमार सिन्हा ने बताया कि साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन यूनिट के तहत देशभर की पुलिस एजेंसियां आपस में जुड़कर काम कर रही हैं। फर्जी सिम कार्ड और म्यूल अकाउंट संचालकों पर भी लगातार कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान कॉल, लिंक या लालच भरे ऑफर से दूर रहें और तुरंत पुलिस को सूचना दें।

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