दुर्ग। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिला दुर्ग द्वारा दिनांक 29 दिसंबर 2025 को मुख्यालय स्थित केन्द्रीय जेल दुर्ग का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने महिला प्रकोष्ठ में निरुद्ध महिला बंदियों से उनके प्रकरणों की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई एवं स्वच्छता व्यवस्था के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जेल अधिकारियों को सजायाफ्ता बंदियों के अपील संबंधी प्रकरणों को अद्यतन करने तथा बंदियों को उनके प्रकरण की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनकी दैनिक दिनचर्या के संबंध में जानकारी ली। नव-आगंतुक बंदियों को उनके प्रकरण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने तथा निजी अधिवक्ता नियुक्त करने में असमर्थ बंदियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता एवं अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई।
जेल प्रशासन को ऐसे बंदी, जिन्हें परिहार का लाभ दिया जा सकता है, उनके लंबित आवेदनों के कारणों सहित जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए गए।
निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला न्यायाधीश ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की SPRUHA (Supporting Potential and Resilience of the Unseen, Held-back and Affected) Scheme, 2025 के अंतर्गत जेल में निरुद्ध कैदियों से संवाद स्थापित कर उनके आश्रित परिवारजनों को होने वाली सामाजिक, आर्थिक एवं व्यवहारिक कठिनाइयों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने यह भी जाना कि कारावास अवधि के दौरान कैदियों के आश्रितों—पत्नी, बच्चों एवं वृद्ध माता-पिता—को आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य उपचार, भरण-पोषण एवं दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने निर्देशित किया कि SPRUHA योजना के अंतर्गत पात्र कैदियों एवं उनके आश्रित परिवारजनों की पहचान कर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाए तथा केंद्र एवं राज्य शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही, पैरालीगल वालेंटियर्स के माध्यम से आश्रित परिवारों का फील्ड स्तर पर सत्यापन कर उनकी समस्याओं के निराकरण हेतु संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए, जिससे कैदियों के परिवारजनों को सामाजिक सुरक्षा एवं संरक्षण मिल सके।
निरीक्षण के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के सचिव, विधि अधिकारी, प्रभारी उप जेल अधीक्षक, महिला प्रकोष्ठ प्रभारी, LADCS के काउंसिल तथा अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
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सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
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