दुर्ग-भिलाई

केंद्रीय विद्यालय दुर्ग का 39वाँ वार्षिकोत्सव: शिक्षा, संस्कृति और उत्कृष्टता का गौरवपूर्ण संगम

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दुर्ग। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय दुर्ग में 39वाँ वार्षिकोत्सव बड़े हर्षोल्लास और गौरव के साथ मनाया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में नगर निगम भिलाई के आयुक्त राजीव कुमार पांडे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विद्यालय प्रबंधन समिति की सदस्य डॉ' दिव्या श्रीवास्तव उपस्थित रहीं।विद्यालय परिसर में उमड़ी विशाल उपस्थिति, विद्यार्थियों की प्रतिभा, और शिक्षकों का समर्पण, समारोह की भव्यता का प्रतिबिंब था। अतिथियों ने विद्यालय की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेल संबंधी उपलब्धियों की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए इसे प्रदेश का गौरव बताया।मुख्य अतिथि ने कहा कि यह विद्यालय आधुनिक शिक्षा, राष्ट्रीय मूल्यों, अनुशासन और प्रतिभा विकास का अनूठा केंद्र बन चुका है। विशिष्ट अतिथि ने विद्यालय को सृजनशीलता, व्यक्तित्व विकास और संवेदनशील शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थी विद्यालय की धरोहर हैं और परिश्रम को आदत बनाकर, सत्य, सेवा और समर्पण के मार्ग पर चलकर वे समाज और राष्ट्र को नई दिशा दे सकते हैं।

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उन्होंने शिक्षा को चरित्र निर्माण, मानवीयता, और नेतृत्व क्षमता के विकास का माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों से सपनों को लक्ष्य में बदलने का आह्वान किया।समारोह में वर्ष भर राष्ट्रीय स्तर पर खेल, कला और विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। साथ ही उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त कराने वाले शिक्षकों की प्रतिबद्धता और योगदान को सम्मानित करते हुए विद्यालय ने उन्हें प्रमाण पत्र प्रदान कर गौरवान्वित किया।सम्मानित शिक्षकों के रूप में नीतादास, धर्मेन्द्र कुमार यादव, डॉ. राखी श्रीवास्तव, बिंदु शिवराजन, सतविंदर कौर, राहत तस्नीम, वंदिनी साहू और राजेश कुमार को मंच पर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम के सांस्कृतिक चरण ने दर्शकों का मन मोह लिया।

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इस अवसर पर विद्यालय ने अपने 'लघु भारत' की पहचान को और सशक्त करते हुए केरल के त्रिशूर की संस्कृति की झलक प्रस्तुत की; इसके साथ ही राजस्थानी वाद्ययंत्रों की मनमोहक धुनों ने पूरे हॉल में सांस्कृतिक विविधता का एहसास कराया। छात्रों द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक नृत्य तथा विभिन्न लोकधुनों पर आधारित नृत्य-नाट्यों को दर्शकों ने खूब सराहा।विद्यालय ने देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को एक ही मंच पर प्रस्तुत कर यह संदेश दिया कि केरल से लेकर छत्तीसगढ़ तक, भारतीय संस्कृति की समृद्ध पहचान विद्यार्थियों की रचनात्मकता और कला अभिव्यक्ति के माध्यम से जीवंत होती है।समारोह के समापन पर अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया और विद्यालय परिवार ने नए सत्र में उच्चतर उपलब्धियों को लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

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विद्यालय का यह वार्षिकोत्सव शिक्षा, संस्कृति, अनुशासन और सम्मान के समन्वय का शानदार उदाहरण प्रस्तुत कर रहा था।मंच संचालन में विद्यार्थियों अनुज, अनन्या, अनुष्का, अविनाश, श्रिया और सान्वी ने मुख्य भूमिका निभाई। समापन सांकेतिक भाषा में राष्ट्रगान के माध्यम से किया गया।समाचार के अंत में यह उल्लेखनीय रहा कि डॉ' श्रावणी सिंह, रचना पाल एवं पुरुषोत्तम साहू ने संपूर्ण कार्यक्रम के संचालन एवं संयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और समारोह को सफल बनाने में प्रमुख योगदान दिया।

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