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गूंजा सैक्सोफोन का जादू -  “साज की आवाज” बना छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा संगीतमय आयोजन

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-6 सैक्सोफ़ोनिस्टों की अद्भुत प्रस्तुति से संगीतप्रेमी हुए मंत्रमुग्ध- गायिका पूर्वा, श्रीजा और पुष्पांजलि की मधुर गायकी ने बांधा समां
भिलाई।
संगीत की सरगम से झंकृत भिलाई के कला मंदिर में बीती रात ऐसा दृश्य देखने को मिला जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर में स्वर्णाक्षरों से अंकित रहेगा। विश्व सैक्सोफोन दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित “साज की आवाज – एक संगीतमय संध्या” कार्यक्रम ने संपूर्ण दुर्ग-भिलाई क्षेत्र को संगीत के आनंद सागर में डुबो दिया।
यह विशाल आयोजन छत्तीसगढ़ ऑफिसर्स एसोसिएशन भिलाई इस्पात संयंत्र, छत्तीसगढ़ मंच दुर्ग, एवं दुर्ग सांस्कृतिक मंच के संयुक्त तत्वावधान में भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ।
खचाखच भरे कला मंदिर में दर्शकों की उमड़ी भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की जनता सच्चे अर्थों में संगीतप्रेमी है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ।
मुख्य अतिथि सेफी चेयरमेन एवं ऑफिसर्स एसोसिएशन, भिलाई इस्पात संयंत्र के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार बंछोर थे।
उन्होंने कहा  “साज की आवाज केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भिलाई की आत्मा का संगीत है। कला मंदिर में इतने उच्च स्तर का आयोजन देखकर गर्व महसूस हो रहा है। भिलाई स्टील प्लांट परिवार भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को पूरा सहयोग देता रहेगा।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कैलाश जैन 'बरमेचा' ने की। विशेष अतिथियों में डॉ. श्रीमती मानसी गुलाटी, विजय अग्रवाल, बंटी भाई अशोक राठी, श्रीमती मंजू जैन बरमेचा, चंद्रिका दत्त चंद्राकर, डॉ. रौनक जमाल, अजय बोहरा एवं हेमंत खूंटे शामिल रहे।
-छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के 6 सैक्सोफ़ोनिस्ट —
अनिल केमें, लिलेश कुमार, प्रमोद केमें, आदर्श केमें (छत्तीसगढ़),
राजन वंशकार (मध्यप्रदेश), एवं परेश लोखंडे (महाराष्ट्र) —
ने जब सैक्सोफोन की मधुर तानों से सुरों का जादू बिखेरा, तो पूरा कला मंदिर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध गायिका पूर्वा श्रीवास्तव ने अपने गीतों से ऐसा समां बांधा कि श्रोता भावविभोर हो उठे। उनकी प्रस्तुति से प्रसन्न होकर वरिष्ठ समाजसेवी विजय अग्रवाल ने उन्हें ₹50,000 की नगद राशि देने की घोषणा की।
वहीं बाल गायिका श्रीजा और पुष्पांजलि हिरवानी ने अपनी मासूम और मधुर आवाज से वातावरण को और भी सुरमय बना दिया।
नागपुर के वरिष्ठ गायक शकील भाई, तथा स्थानीय कलाकार गुलाब चौहान और तुलसी सोनी की प्रस्तुतियों पर भी श्रोताओं ने दिल खोलकर तालियां बजाईं।
कार्यक्रम का संचालन दुर्ग-भिलाई के प्रसिद्ध मंच संचालक तुलसी सोनी ने अपनी हाजिरजवाबी और प्रभावी शैली में किया।

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विशेष उल्लेखनीय क्षण तब आया जब कार्यक्रम के संरक्षक कैलाश जैन बरमेचा द्वारा, मुख्य अतिथि नरेंद्र कुमार बंछोर के करकमलों से, छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध सैक्सोफोनिस्ट अनिल केमें को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु ₹11,000 की नगद राशि प्रदान कर सम्मानित कराया गया।
इसी प्रकार, बरमेचा जी द्वारा वरिष्ठ समाजसेवी बी. डी. निजामी के करकमलों से नागपुर के प्रसिद्ध गायक शकील भाई को उनकी भावपूर्ण गायकी हेतु ₹5,000 की नगद राशि दिलवाई गई।
इन सम्मान क्षणों ने उपस्थित जनसमूह को भावनाओं से भर दिया — और पूरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट लंबे समय तक गूंजती रही।
म्यूजिशियन टीम में मनोज नायक, आशुतोष लांजेवार, सत्येंद्र हिरवानी, पवन मांझी, रतन बारीक एवं हुपेंदर हिरवानी शामिल थे। इन सभी ने अपने सुरों और ताल से इस आयोजन में आत्मा फूँक दी।
छत्तीसगढ़ मंच के अध्यक्ष ईश्वर सिंह राजपूत, संरक्षक कैलाश जैन बरमेचा, सचिव तुलसी सोनी एवं वरिष्ठ सदस्य गुलाब चौहान ने संयुक्त रूप से बताया,  “यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत का अब तक का सबसे बड़ा सैक्सोफोन म्यूजिकल शो सिद्ध हुआ है। दर्शकों की उमंग और कलाकारों की प्रतिभा ने इसे ऐतिहासिक बना दिया है।”
यश यदु के निर्देशन में मंच का संचालन और प्रकाश संयोजन इतना सधा हुआ था कि हर प्रस्तुति के बाद दर्शक खड़े होकर तालियों से कलाकारों का अभिवादन करते रहे।
भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारियों ने कहा कि  “कला मंदिर के इस ऐतिहासिक आयोजन ने एक नया मानक स्थापित किया है। इस तरह के भव्य सांस्कृतिक आयोजन शहर की पहचान बनेंगे, और हम भविष्य में भी ‘साज की आवाज’ जैसे आयोजनों में पूर्ण सहयोग देने के लिए तत्पर रहेंगे।”
कार्यक्रम में समाजसेवी राजेश राजा, दीपेन्द्र हलधर, बी. डी. निजामी, सुरेन्द्र काके, कृष्ण साहू, यशवंत, तुलसी साहू, तरुण देशमुख, जाहिद अली, हाजी मिर्जा साजिद बैग, ज्योति ध्रुव, एस. के. भगत, किशोर जैन, इंदरचंद सोनी, मोहन सिन्हा, जबीर भाई, कासिम भाई, अबरार पुवार, अनिल अग्रवाल सहित सैकड़ों संगीतप्रेमी उपस्थित थे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि “कला मंदिर का यह संगीतमय पर्व भिलाई की यादों में सदैव जीवंत रहेगा।”
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन छत्तीसगढ़ मंच दुर्ग के अध्यक्ष ईश्वर सिंह राजपूत द्वारा किया गया। उन्होंने कहा  “यह केवल संगीत की संध्या नहीं थी, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा का उत्सव था। जिस तरह से सैकड़ों श्रोता सैक्सोफोन की धुन में खो गए, वह इस भूमि की सांस्कृतिक गहराई का प्रमाण है।”
 “साज की आवाज” ने सिद्ध कर दिया कि जब सुर और समर्पण साथ चलते हैं, तो कला मंदिर जैसे सभागार भी भक्ति और भावनाओं के मंदिर बन जाते हैं। यह आयोजन आने वाले वर्षों तक छत्तीसगढ़ की संगीत यात्रा का प्रेरणास्त्रोत रहेगा।

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