होम / दुर्ग-भिलाई / धूमधाम से मनाया गया गणगौर महोत्सव, ईशरजी की सालियों ने रखा व्रत, पीहर के समृद्धि की कामना की
दुर्ग-भिलाई
दुर्ग। गणगौर महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान सुहागिनों ने व्रत रखा और गणगौर की पूजा अर्चना कर पति की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना की। अविवाहित युवतियों ने भी अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखा। इस दौरान जिले में कई जगह गणगौर महोत्सव का आयोजन किया गया।
दुर्ग के ईशरजी_की_शालिया ग्रुप चंडी मंदिर चौक ने भी बड़े ही धूमधाम से गणगौर महोत्सव मनाया, जिसमें ग्रुप की महिलाओं ने उनकी बंदोला हल्दी मेहंदी और शादी फंक्शन का आयोजन किया। महोत्सव के आखिरी दिन 31 मार्च को गणगौर तीज के दिन माता जी को विदाई दी गई। इसमे हर बंदोला में अलग-अलग प्रांत की वेशभूषा पहनी थी। जिसमें साउथ इंडियन थीम, वृंदावन थीम, राजस्थानी थीम रखी गई।
इस दौरान कार्यक्रम में शामिल ऋतु गुप्ता ने बताया कि गणगौर पर्व मारवाड़ी लड़किया और नव विवाहित महिलाएं मनाती है। यह पर्व होलिका दहन की सुबह से शुरू होता है और अठारह दिनों तक चलता है। यह चैत्र शुक्त पक्ष तृतीया को समाप्त होता है। इस दिन सभी सुहागिनें पूजा करती हैं। इसके बाद गोधूलि बेला में तालाब में प्रवाहित कर दिया जाता है। इस पर्व में भाइयों की भी भूमिका होती है। जिस लड़की के भाई नहीं होते वे अपना धर्म भाई बना कर बनोड़ा के सायं उसका तिलक करती है। इस में मुख्यत: शिव पार्वती जिनका एक नाम गौरा भी है। इनकी पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि गणगौर पूजन में कन्याएं और महिलाएं अपने लिए अखण्ड सौभाग्य, अपने पीहर और ससुराल की समृद्धि तथा गणगौर से प्रतिवर्ष फिर से आने का आग्रह करती हैं। महोत्सव में ईशर जी की शालिया ग्रुप की ऋतु गुप्ता, खुशबू, नेहा, अंकिता, ऋतु, हर्षिता, डिंपल, आर्या, आराध्या, कोइशा, शिवानी, निशि, महक, तालिका, पायल, वंशिका, रेनू, वर्षा, प्रिया ने सभी के साथ बड़ी धूम धाम से गणगौर का उत्सव मनाया।
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