फाईट द बाइट, जान लेवा 3 बीमारी, सतर्कता और जागरूकता से बचा सकते है खुद की और दूसरों की जान

फाईट द बाइट, जान लेवा 3 बीमारी, सतर्कता और जागरूकता से बचा सकते है खुद की और दूसरों की जान
RO No.12822/158

RO No.12822/158

RO No.12822/158

रिसाली। निचली बस्ती हो या फिर पाॅश कालोनी मच्छर का प्रकोप हर जगह होता। मच्छर के काटने से डेंगू, चिकन गुनिया, मलेरिया जानलेवा बीमारी समेत फाइलेरिया से बचाव हम खुद कर सकते है। जरूरत है सप्ताह में एक दिन बस आधा घंटा समय की। यह समय न केवल स्वयं को स्वस्थ्य रखेगा बल्कि महामारी को पनपने से रोकेगा। शुक्रवार को नगर पालिक निगम रिसाली की आयुक्त मोनिका वर्मा और जिला मलेरिया अधिकारी डाॅ. सी.बी.सी. बंजारे ने कार्यशाला में बचाव के तरीकों को विस्तार से बताया। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर, आजीविका विभाग के सिटी मिशन प्रबंधक, सी.आर.पी समेत अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। खास बात यह है कलेक्टर ऋचा प्रकाश चैधरी फाईट द बाइट अभियान को प्राथमिकता से जिले में लागू किया है।
 आयुक्त मोनिका वर्मा ने कहा कि कर्मचारी प्रत्येक बुधवार को अपने कार्य स्थल पर  सफाई करे और रविवार को अपने घर और आस पड़ोस में आधा घंटे समय खुद के लिए निकालने पे्ररित अवश्य करे। वहीं जिला मलेरिया अधिकारी ने बचाव के तरीके को विस्तार से बताया।
आप आधा घंटे में यह करे
- सबसे पहले कूलर को साफ करें। अगर आपको कूलर के टैंक में लार्वा या फिर कूलर में कीड़े नजर आए तो टेमीफाॅस डाले ओर 1 घंटे तक कूलर में लगे टुल्लू पंप को चालू रखे। इसके बाद पानी को खाली कर दे।
- घर के आंगन, किचन गार्डन और छत को अच्छे से देखे कि ऐसा कोई बर्तन, खिलौना का टुकड़ा या फिर ऐसा कोई चीज तो नहीं पड़ा है, जिसमें बारिश का पानी जमा हो।
- घर के परिसर में खुले में डस्टबीन रखा है तो उसे ढक कर रखे।
- घर के आस पास पानी ठहराव न होने दे।

अनदेखी करने पर होगी कार्रवाई
आयुक्त मोनिका वर्मा ने निगम के स्वास्थ्य और राजस्व विभाग को निर्देश दिए कि घरों में टेमीफाॅस दवा उपलब्ध कराए। साथ ही बीमारी से बचने के तरीके को बताए। अगर लापरवाही होती है तो महामारी एक्ट के तहत पहली बार 500 दूसरी बार 1000 तीसरी बार 2000 जुर्माना वसूल करे। इसके बाद भी घरों में अगर लार्वा मिला तो बिना सूचना के नल कनेक्शन विच्छेद की कार्रवाई करे।
इसे रखे याद
डेंगू या मलेरिया मच्छर के काटने से होता है। एक बार में मच्छर 200-2500 अंडे देता है और 7 दिवस के अंदर लार्वा से मच्छर बनने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
खूशबू से नहीं आते मच्छर
अगर आपके यहां खाली जगह है, गमला है, या फिर फुलवारी है तो आप तुलसी, श्यामा तुलसी, पुदीना, दौना, लेमनग्रास, लहसून या फिर अजवाइन का पौधा अवश्य लगाए। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इसके सुगंध से मच्छर दूर हो जाते है।
आप श्रमदान अवश्य करे
रिसाली निगम प्रत्येक शनिवार को तालाबों की सफाई करा रहा है। तालाब के पानी के किनारे नमी की वजह से घास ऊग आते है। घास और पानी के बीच मच्छर अंडा देता है। अगर इसे नजर अंदाज किया गया तो बल्क में मच्छर होगा। इससे आस पास की आबादी प्रभावीत होगी। आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि इस अभियान के महत्व को समझते हुए नागरिक अपनी भूमिका अवश्य तय करे।
जन स्वास्थ्य विभाग इस पर करेगा फोकस
- बंद आवास में पानी तो नहीं बह रहा।
- गली मुहल्ले में पानी जमा तो नहीं हो रहा।
- ठेले व गुमटी संचालक दुकान के पीछे खुले में पानी स्टोर कर तो नहीं रहे है।
- टायर खुले या दुकानों में जमा कर रखा तो नहीं गया है।
- बाजार में कही सब्जी व फल के अवशेष तो खुले में नहीं फेका गया है।
आपकों जानना आवश्यक है
1. एडीज एजिप्टी मच्छर:- इस मच्छर के काटने से डेंगू, चिकन गुनिया होता है। दोनो जानलेवा है। यह साफ पानी में पनपता है।
2. मादा अनोफेलीज:- इस मच्छर के काटने से मलेरिया होता है। यह ठहरे हुए पानी में पनपता है। घर के आस पास अगर पानी ठहरता है तो मच्छर पनपने की आशंका बढ़ जाती है।
3. मैनसोनाइडिस प्रजाति:- इस मच्छर के काटने से फाइलेरिया हाथी पाॅव होता है। यह मच्छर लंबे समय तक जमा गंदे पानी में पनपता है। यह मच्छर पानी की सतह में उड़ते नजर आते है।