नक्सलियों का खात्मा क्यों नही बन रहा बड़ा चुनावी मुद्दा, शीर्ष नक्सली नेता दीपक राव गिरफ्तार, एक करोड़ का था इनाम

नक्सलियों का खात्मा क्यों नही बन रहा बड़ा चुनावी मुद्दा, शीर्ष नक्सली नेता दीपक राव गिरफ्तार, एक करोड़ का था इनाम
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद चुनाव में बड़ा मुद्दा क्यों नहीं बन पाता? यह सोचनीय प्रश्न है।  छत्तीसगढ़ के चारों तरफ के राज्य तेलंगाना, आंध्रा, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, झारखंड में लाल आतंक पर एक हद तक लगाम डाला जा चुका है।  किंतु छत्तीसगढ़ नक्सलवाद की चपेट से अब तक मुक्त नहीं हो सका है।  कई सालों से छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलियों से लड़ रही है। किंतु आज तक लाल आतंक से निजात नहीं मिल सका है।  छत्तीसगढ़ में नक्सली हमलो  को अंजाम देने वाले दीपक राव को हैदराबाद की एक अस्पताल में तेलंगाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।  ताड़मेटला, झीरम घाटी, दरभा सहित कई वारदातों के मास्टर माइंड दीपक राव पर एक करोड रुपए का इनाम था।  दीपक राव की गिरफ्तारी निश्चित ही पुलिस व सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता है। नक्सलियों के लिए यह जबरदस्त झटका भी है।  किंतु देखा गया है कि नक्सली नेताओं के विस्थापन के बाद दूसरे नेता उसका स्थान ले लेते हैं । दीपक राव अभी बीमार है और बुजुर्ग हो चले हैं । अपनी पूरी जवानी उन्होंने नक्सली वारदातों को अंजाम देने में बिता दिया । अब उम्र के उत्तरार्ध में वह पुलिस की हत्थे चढ़ा है। देखा गया है नक्सली संगठन अपने विकल्प के तौर पर दूसरा नेता तैयार करके रखते हैं। दीपक राव के बाद कोई दूसरा नक्सल लीडर इस तरह के वारदातों को अंजाम देने की योजना बनाएगा।
अभी सबसे ज्यादा नक्सली वरदात छत्तीसगढ़ राज्य में होते हैं । छत्तीसगढ़ में नक्सली मूवमेंट को तेलंगाना व आंध्र प्रदेश के नक्सल नेता अंजाम देते हैं । छत्तीसगढ़ में जो नक्सली पकड़े जाते हैं ज्यादा से ज्यादा वे हार्डकोर कमांडर और निचले स्तर के लोग होते हैं। उन्हें पकड़ने से नक्सली वारदातों पर अंकुश नहीं लग पाता । हालांकि पूछताछ में जरूरी सूचनाओं जरूर मिल जाती है। मगर नक्सलियों के पूर्ण खात्मे के लिए आखिरी योजना अब तक नहीं दिखी है।  यूं कहें कि नक्सली आंदोलन के ताबूत में आखिरी कील ठोकने की जरूरत है और वह तब होगा जब नक्सली वारदातों के उन्मूलन का निर्णायक प्रयास किया जाए।