-दंतेवाड़ा में दिव्यांगजनों के लिए तीन दिवसीय कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ, 768 हितग्राही होंगे लाभान्वित
-बस्तर के 200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’, रोजगार और स्वरोजगार के खुलेंगे नए अवसर

रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हंसता-खेलता, खुशहाल और समृद्ध बनाना है। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।
अमित शाह गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 हितग्राही शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।
-नक्सली हिंसा के पीड़ितों का पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों ने अनेक निर्दोष नागरिकों को दिव्यांग बना दिया। यह मानवता के प्रति गंभीर अपराध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था। अब नक्सलवाद से मुक्ति के बाद प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना और उनके सम्मानपूर्ण जीवन की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और कृत्रिम अंग उपलब्ध कराना उनके जीवन को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रभावित लोगों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ सकेंगे।
शाह ने बताया कि 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें अकेले बस्तर क्षेत्र के 1,570 से अधिक हितग्राही शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा उस पीड़ा को दर्शाता है, जिसे बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों ने दशकों तक सहन किया है।
-आत्मसमर्पण करने वाले 8,526 नक्सलियों के पुनर्वास के प्रयास
अमित शाह ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं। 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। वहीं, 455 लोगों को नौकरी दी गई और 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। क्षेत्र में 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए हैं और 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई है।
सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं और इलवाद पंचायत पुरस्कार के अंतर्गत 44 पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाना है।
-200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे सेवा और विकास के केंद्र
केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर पहले सुरक्षा बलों के जवान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, अब उन्हीं केंद्रों से शासन की योजनाओं और जनकल्याणकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
इन सेवा डेरों के माध्यम से स्थानीय जरूरतों के अनुसार कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इससे युवाओं और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर मिलेंगे और बस्तर के विकास को गति मिलेगी।
शाह ने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्लानार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों से बस्तर की तस्वीर बदल रही है। जहां कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं, वहां अब युवा खेलों में भाग ले रहे हैं और जनजातीय समाज अपनी कला, संस्कृति एवं परंपराओं को आगे बढ़ा रहा है।
-नक्सलमुक्त बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय क्षेत्र बनाना लक्ष्य : विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सलवाद की चुनौती से मुक्ति मिली है। यह उपलब्धि वीर सुरक्षा बलों के साहस, पराक्रम और बलिदान तथा बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है।
मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में प्राण न्योछावर करने वाले जवानों और नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता लंबे समय से भय और हिंसा से मुक्ति चाहती थी। लोग शांति, सुरक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते थे। जनता के इसी विश्वास और सहयोग ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
साय ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। अब नक्सलमुक्त बस्तर को तेजी से विकास और समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारा संकल्प बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाना है।
-‘नियद नेल्लानार’ से दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही विकास की रोशनी
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से उन दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, जो दशकों से विकास से वंचित रहे। आज 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं। घरों तक नल से जल पहुंचाने और दूरसंचार सेवाओं के विस्तार का काम तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए अस्पतालों की व्यवस्था की जा रही है। गांवों में राशन दुकानों की उपलब्धता से लोगों को खाद्यान्न प्राप्त करने में होने वाली परेशानियां भी कम हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बस्तर के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल और संचार सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है।
-नेतानार से शुरू हुआ पहला सेवा डेरा
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा प्रारंभ किया गया है। यहां स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही जंगलों में उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियां भी शुरू की गई हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इन केंद्रों का उद्देश्य ग्रामीणों को कौशल विकास से जोड़ना और रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इससे सुरक्षा शिविर अब जनसेवा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और विकास के केंद्र बनेंगे।
-सिंचाई और पशुपालन से बढ़ेगी ग्रामीण परिवारों की आय
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के समग्र विकास के लिए कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका को भी प्राथमिकता दी जा रही है। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। डेयरी विकास के लिए भी समझौता किया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
-दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों के कारण बस्तर के अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने हाथ-पैर गंवाए हैं। ऐसे प्रभावित लोगों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को सुगम बनाना तथा उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ाना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर में 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर देना है।
उन्होंने इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वाली भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और अन्य संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
-नक्सल हिंसा के पीड़ितों की सहायता का अभियान जारी रहेगा : विजय शर्मा
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों ने अनेक निर्दोष ग्रामीणों के जीवन को प्रभावित किया है। कोई बच्चा गांव में खेलते समय, कोई किसान खेत में जाते हुए और कोई ग्रामीण दैनिक कार्य करते समय विस्फोट का शिकार हुआ। किसी ने अपना हाथ खोया, किसी ने पैर और किसी की आंखों की रोशनी चली गई।
-उन्होंने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद बस्तर की जनता ने नक्सलवाद से मुक्ति का संकल्प नहीं छोड़ा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सहायता का अभियान निरंतर जारी रहेगा। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।
-कृत्रिम अंग मिलने से दिव्यांगजनों में लौटा आत्मविश्वास
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने दिव्यांगजनों से संवाद कर उनके अनुभव जाने। सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद उसे काटना पड़ा। अब कृत्रिम पैर मिलने से वे दोबारा चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए फिर से तैयार हैं।
बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में चिंतावागु नदी में मछली पकड़ने जाते समय नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर से चल पा रहे हैं।
इसी प्रकार दंतेवाड़ा जिले के जावंगा और मेटापाल के जन्मजात अस्थिबाधित दिव्यांगजन अजय सोरी एवं कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि इससे दैनिक आवागमन में काफी सुविधा होगी। लाभार्थियों ने इस पहल के लिए केंद्र और राज्य सरकार सहित सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त बस्तर में अब शांति और सुरक्षा के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यटन, संस्कृति और अधोसंरचना के विकास के नए अवसर खुले हैं। सरकार का संकल्प है कि बस्तर का प्रत्येक गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, हर युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार के जीवन में खुशहाली आए। दशकों तक हिंसा और भय की पीड़ा झेलने वाला बस्तर अब शांति, समृद्धि और विकास की नई पहचान बनाएगा।
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