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स्थानीय रोजगार नीति के पालन को लेकर डॉ. प्रतीक उमरे ने उठाए सवाल

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-मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष रोजगार ऑडिट की मांग
दुर्ग।
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन एवं भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने दुर्ग-भिलाई औद्योगिक क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिए जाने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन प्रेषित कर औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष रोजगार ऑडिट कराने की मांग की है।
डॉ. उमरे ने कहा कि राज्य सरकार की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के तहत अकुशल श्रेणी की नौकरियों में 100 प्रतिशत तथा कुशल पदों पर 70 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का प्रावधान है। उनका आरोप है कि दुर्ग जिले में इस नीति का अपेक्षित रूप से पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ उद्योगों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने दावा किया कि दुर्ग जिले में 71 हजार से अधिक एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत हैं और इनमें से अनेक इकाइयां राज्य सरकार की विभिन्न सुविधाओं एवं प्रोत्साहनों का लाभ ले रही हैं। इसके बावजूद स्थानीय युवाओं को नियमित रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय युवाओं को अनौपचारिक ठेका पद्धति के माध्यम से रोजगार दिया जा रहा है, जिससे उन्हें न्यूनतम मजदूरी और ईपीएफ जैसी सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
डॉ. उमरे ने श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिले के युवा योग्य और मेहनती होने के बावजूद रोजगार के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जिले में युवाओं का स्किल सर्टिफिकेशन रेट 95.9 प्रतिशत है। उनका आरोप है कि उद्योगों द्वारा प्रस्तुत रोजगार संबंधी जानकारी का अधिकारियों द्वारा पर्याप्त स्तर पर सत्यापन नहीं किया जाता।
उन्होंने मुख्यमंत्री से हथखोज और भिलाई के औद्योगिक क्षेत्रों में तत्काल ‘स्पेशल एम्प्लॉयमेंट ऑडिट’ कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने कंपनियों के ईपीएफओ डेटा का स्थानीय मूल निवासी प्रमाण पत्रों से मिलान कराने की मांग रखी है, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के प्रावधानों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
डॉ. उमरे ने जिले के डीएमएफ फंड के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाते हुए मांग की कि युवाओं को 21वीं सदी के आधुनिक कौशल की ट्रेनिंग देने के लिए इस निधि का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और औद्योगिक विकास के साथ स्थानीय हितों को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।

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