दुर्ग। जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में भगवान महावीर स्वामी का जन्म वाचन समारोह श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम जैन संत डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज एवं साध्वी श्री लक्ष्मी जी म.सा. के पावन सानिध्य में आयोजित किया गया।
जन्म वाचन समारोह के अवसर पर जय आनंद मधुकर रतन पाठशाला के बच्चों द्वारा भगवान महावीर स्वामी के जन्म प्रसंग एवं उनके जीवन संदेश पर आधारित सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया और सभी ने करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी के जन्म वाचन का वाचन करते हुए भक्तिमय भजन प्रस्तुत किया। उन्होंने भगवान महावीर के जीवन, त्याग, तपस्या, संयम और अहिंसा के संदेश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान महावीर का जीवन संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता सुख है और परतंत्रता को हम दुख समझते हैं, लेकिन स्वच्छंदता व्यक्ति को लगामहीन बना देती है। जीवन में स्वतंत्रता के साथ अनुशासन और संयम का होना अत्यंत आवश्यक है। भगवान महावीर ने संयमित जीवन के माध्यम से आत्मकल्याण का मार्ग दिखाया।
धर्मसभा में डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज ने भगवान महावीर के जीवन-चरित्र के विभिन्न पहलुओं पर सुंदर एवं प्रेरणादायी संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का संदेश केवल किसी एक समाज या वर्ग के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए है। अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम और आत्मजागरण उनके जीवन के प्रमुख संदेश हैं, जिन्हें अपनाकर मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
जन्म वाचन के पावन अवसर पर पुनीत मुनि जी महाराज ने भी अपनी मधुर वाणी में सुंदर भजन प्रस्तुत किया। भजनों एवं धार्मिक वातावरण से पूरा भवन भक्तिरस में सराबोर हो गया।
समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे। भगवान महावीर स्वामी के जन्म वाचन के दौरान पूरे परिसर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम का उद्देश्य भगवान महावीर के जीवन एवं उनके अमर संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा बच्चों में धर्म, संस्कार और संस्कृति के प्रति रुचि जागृत करना रहा।
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