होम / दुर्ग-भिलाई / संस्कृत महोत्सव में जीवंत हुई शास्त्रार्थ परम्परा, व्याख्यान से जाना संस्कृत का महत्व
दुर्ग-भिलाई
-छत्तीसगढ़ के साथ देश और अमेरिका से भी संस्कृत प्रेमी जुड़े, छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान का 15 दिवसीय ऑनलाइन संस्कृत महोत्सव संपन्न
भिलाई। संस्कृत भाषा, संस्कृति, साहित्य और भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण और संवर्धन हेतु छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थानम् का 15 दिवसीय ऑनलाइन संस्कृत महोत्सव संपन्न हुआ। इस दौरान संस्कृत में निहित योग, आयुर्वेद, दर्शन एवं भारतीय परंपराओं से जुड़ी विविध ज्ञानवर्धक और रचनात्मक गतिविधियों का सफल आयोजन हुआ।
महोत्सव का शुभारंभ स्वामी निर्मल स्वरूप महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। संस्कृत में नवाचार, स्तुति प्रतियोगिता, शब्द भंडार, काशी की शास्त्रार्थ परंपरा, संस्कृत-हिंदी के विश्वकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर विशेष व्याख्यान, आदर्श ध्येय वाक्य प्रतियोगिता, संस्कृत शोभायात्रा, संस्कृत प्रश्नमंच, बदरीनाथ धाम विषयक व्याख्यान एवं संस्कृत रूपक आदि विषयों पर हुए व्याख्यान लोगों के आकर्षण के केंद्र रहे।
महोत्सव में डीडी न्यूज नई दिल्ली के डॉ. नारायण दत्त मिश्र एवं शुभमय मुखर्जी, पं. हेमन्त मिश्र, पं. अंबरीश त्रिपाठी, पं. शिवकुमार पाण्डेय, डॉ. अमित बन्दोलिया (बदरीनाथ धाम), प्रो. के. विश्वनाथन, वैद्य प्रशांत मिश्र और हार्वर्ड विश्वविद्यालय अमेरिका से डॉ. राधा विलेण्डर मान आदि अनेक विद्वानों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
विविध सत्रों में संपन्न इस वैश्विक आयोजन के चतुर्थ सत्र की अध्यक्षता आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने की। दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव के डॉ. ललित प्रधान ने "छत्तीसगढ़ी भाषा पर संस्कृत का प्रभाव" आलेख प्रस्तुत किया। सत्र अध्यक्ष आचार्य डॉ. शर्मा की पुस्तक "छत्तीसगढ़ में संस्कृत" में भी लोगों ने विशेष रुचि दिखाई।
संस्थान के सचिव एवं इस वैश्विक समारोह के संयोजक डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि यह 15 दिवसीय संस्कृत महोत्सव केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, अपितु भारतीय ज्ञान, संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता के समन्वय का सार्थक प्रयास रहा। संस्थान के अध्यक्ष आचार्य नवीन शर्मा ने बताया कि विद्वानों के मार्गदर्शन, विद्यार्थियों की सक्रियता और रचनात्मक प्रतियोगिताओं ने महोत्सव को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बना दिया। संगठन सचिव आचार्य मुकेश चौबे, निदेशक डॉ. रूपेंद्र कुमार तिवारी, दुर्ग जिला इकाई संरक्षक आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा, संयोजक आचार्य हेमंत शर्मा, संयोजिका खैरागढ़ जिला डॉ. पूर्णिमा केलकर, रायपुर जिला संयोजिका उर्मिला उर्मि, संरक्षक रायपुर जिला डॉ. तोयनिधि वैष्णव, अशोक नायक, यशवंत उपाध्याय, आचार्य विवेक पाण्डेय, उर्मिला पाण्डेय, सरस्वती श्रीवास्तव समेत रायगढ़, सारंगढ़ एवं जांजगीर-चांपा आदि विभिन्न जिलों के संरक्षक-संयोजकों की भी आयोजन को सफल बनाने में महती भूमिका रही। समापन समारोह के मुख्य अतिथि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति आचार्य डॉ. शिवशंकर मिश्र थे, जबकि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति आचार्य डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल ने अध्यक्षता की।
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