दुर्ग। "गुरु केवल मार्ग नहीं बताते, वे स्वयं मार्ग बनकर जीवन को प्रकाशमय कर देते हैं। गुरु का सान्निध्य आत्मा को संयम, साधना और सम्यक्त्व की ओर अग्रसर करता है। गुरु के चरणों में समर्पित प्रत्येक भाव जीवन को सार्थक बना देता है।" गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर दुर्ग स्थित श्रमण संघ परिवार के सदस्यों ने अपने आराध्य राष्ट्र संत मानव मिलन संस्थापक परम पूज्य गुरुदेव श्री मणिभद्र मुनि जी महाराज के चरणों में अद्भुत श्रद्धा और भक्ति का परिचय देते हुए 50 बेला एवं 5 तेला तपस्या की भावपूर्ण भेंट अर्पित की। इस अवसर पर पूरा वातावरण गुरुभक्ति, साधना और आध्यात्मिक उल्लास से ओत-प्रोत रहा।
गुरुदेव ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल वंदन तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनके बताए हुए संयम, तप, त्याग और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने में ही वास्तविक गुरुभक्ति निहित है। तपस्या आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ माध्यम है और यह आत्मबल तथा आध्यात्मिक उन्नति का आधार बनती है।
-चार माह चलेगा नवकार महामंत्र, अलग-अलग परिवार संभालेंगे जप अनुष्ठान ..
इस अवसर पर यह भी घोषणा की गई कि आज से आगामी चार माह तक नवकार महामंत्र का एक धंटे जाप दोपहर 2:30 बजे से 3:30 बजे तक श्रद्धालुओं द्वारा नियमित रूप से की जाएगी। यह सामूहिक आध्यात्मिक साधना समाज में शांति, सद्भाव और आत्मजागरण का संदेश प्रसारित करेगी।
-तपसियों का सामूहिक पारणा कल ..
बेला एवं तेरा तप के तपस्वियों का सामूहिक पारणा कल जय आनंद मधुकर रतन भवन की भोजनशाला में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सम्पन्न होगा, जिसमें तपस्वी साधक उपस्थित रहेंगे।
गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व गुरुदेव के प्रति अटूट श्रद्धा, तप एवं आराधना के माध्यम से मनाते हुए श्रमण संघ परिवार ने संयम और साधना की प्रेरणा समाज को प्रदान की। गुरुभक्ति और तप की यह अनुपम साधना निश्चित ही अनेक जनों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
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