-44 दिवसीय महाअनुष्ठान में सभी वर्ग एवं संप्रदाय के श्रद्धालु होंगे सहभागी

दुर्ग। जैन धर्म की प्राचीन आध्यात्मिक साधना एवं भक्तिभाव से जुड़ा भक्तामर स्तोत्र संपुट अनुष्ठान लगभग 30 वर्षों के पश्चात श्रमण संघ परिवार में पुनः आयोजित होने जा रहा है। मानव मिलन संस्थापक, नेपाल केसरी राष्ट्र संत डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज के पावन सानिध्य में 17 सितंबर से 30 अक्टूबर तक 44 दिवसीय यह विशेष महाअनुष्ठान आयोजित किया जाएगा। आयोजन को लेकर श्रावक-श्राविकाओं सहित जैन समाज में विशेष उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।
भक्तामर स्तोत्र जैन परंपरा में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति का विषय रहा है। इसके 48 पदों की साधना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भक्तामर की प्रत्येक गाथा के साथ विशिष्ट आध्यात्मिक भाव और साधना जुड़ी हुई है। श्रद्धालु शुद्ध एवं पवित्र भावों से इसके पाठ, जाप और अनुष्ठान को आत्मशांति, सकारात्मकता तथा आध्यात्मिक लाभ का माध्यम मानते हैं।
आयोजन समिति के अनुसार भक्तामर संपुट अनुष्ठान के दौरान प्रत्येक गाथा के आध्यात्मिक महत्व को समझते हुए विधिपूर्वक साधना की जाएगी। अनेक श्रद्धालु भक्तामर की गाथाओं को विभिन्न शारीरिक एवं मानसिक कष्टों से मुक्ति की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक करते हैं। हालांकि इसे चिकित्सा उपचार का विकल्प न मानते हुए धार्मिक साधना और आस्था के रूप में ही ग्रहण किया जाएगा।
इस 44 दिवसीय महाअनुष्ठान की विशेषता यह रहेगी कि इसमें सभी वर्गों एवं विभिन्न संप्रदायों के श्रद्धालुओं को सहभागी बनने का अवसर मिलेगा। सामूहिक भक्ति, जाप, पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक भावों से भरने का प्रयास किया जाएगा।
30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद होने वाले इस आयोजन को लेकर श्रमण संघ परिवार एवं जैन समाज के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। आयोजन की तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के इसमें सहभागी होने की संभावना है।
17 सितंबर से 30 अक्टूबर तक चलने वाला यह 44 दिवसीय भक्तामर संपुट अनुष्ठान धार्मिक आस्था, सामूहिक साधना, भक्ति और आत्मचिंतन का विशेष अवसर बनेगा।
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