होम / दुर्ग-भिलाई / बारिश के साथ दिखने लगा 'मोर गांव मोर पानी' अभियान का असर
दुर्ग-भिलाई
-लगभग 15.96 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता विकसित, गांव-गांव में लबालब भर रही हैं जल संरक्षण संरचनाएं
दुर्ग। जिले में मानसून की सक्रियता के साथ ही 'मोर गांव मोर पानी' महाअभियान के सकारात्मक परिणाम अब गांव-गांव में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में हुई अच्छी वर्षा के कारण अभियान के तहत निर्मित वॉटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच (WAT), अमृत सरोवर, आजीविका डबरी, नवा तरिया एवं अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से वर्षा जल से भर रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ कृषि, सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य आजीविका गतिविधियों को नई मजबूती मिल रही है। राज्य में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से यह अभियान संचालित किया जा रहा है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण समृद्धि का स्थायी आधार बनाना है। अच्छी वर्षा के साथ इन संरचनाओं के भरने से यह स्पष्ट हो गया है कि यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता में वृद्धि तथा ग्रामीण आजीविका सशक्तीकरण की दिशा में प्रभावी परिणाम दे रहा है।
उन्होंने बताया कि जिले में अब तक लगभग 15.96 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता विकसित की जा चुकी है। इसके परिणामस्वरूप वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो रहा है तथा भू-जल स्तर में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है।
-30 आजीविका डबरियां और 112 नवा तरिया बने ग्रामीण विकास का आधार ..
जिले में निर्मित 30 आजीविका डबरियां प्रभावी रूप से वर्षा जल का संचयन कर रही हैं। वहीं 'नवा तरिया-आय के जरिया' पहल के अंतर्गत निर्मित 112 डबरियां एवं तालाब भी वर्षा जल से लबालब भरने लगे हैं। इन संरचनाओं से वर्षभर मत्स्य पालन, सिंचाई, बागवानी तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होंगे।
-वीबी-जी राम (ग्रामीण) मिशन में भी जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता ..
विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत भी जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। वर्तमान में 303 कार्य स्वीकृत किए गए हैं तथा सभी कार्य जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन से संबंधित हैं। इनसे वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
-300 ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी से हुआ व्यापक जल संरक्षण ..
कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में जिले की 300 ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी के माध्यम से भू-जल संवर्धन एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई। अभियान के तहत वॉटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच (WAT), स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच, प्रधानमंत्री आवासों में सोख्ता गड्ढे, 5 प्रतिशत मॉडल तथा ब्रशवुड जैसी लघु जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कराया गया। इसके साथ ही आजीविका डबरी, नवा तरिया, कंटूर ट्रेंच, कुआं निर्माण, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं बोरवेल रिचार्ज जैसे कार्य भी व्यापक स्तर पर किए गए।
-एक वर्ष में जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां ..
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में एक ही वित्तीय वर्ष में जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। इस अवधि में 55,965 वॉटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, 15 परकोलेशन पॉन्ड, 834 रिचार्ज पिट, 1,324 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 9,663 सोख्ता गड्ढे, 123 तालाब, 20,518 कंटूर ट्रेंच, 26 चेक डैम तथा 28 बोरवेल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया।
अच्छी मानसूनी वर्षा के साथ इन जल संरक्षण संरचनाओं के भरने से जिले में भू-जल स्तर में सुधार, सिंचाई क्षमता में वृद्धि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिल रही है। 'मोर गांव मोर पानी' अभियान जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाते हुए जल सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, कृषि उत्पादकता में वृद्धि तथा सतत ग्रामीण विकास की दिशा में नए आयाम स्थापित कर रहा है।
संपादक- पवन देवांगन
पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)
ई - मेल : dakshinapath@gmail.com
मो.- 9425242182, 7746042182
हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।
सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
Copyright 2024-25 Dakshinapath - All Rights Reserved
Powered By Global Infotech.