राजनीति

बस्तर से दिल्ली तक गूंजा सेवा, सनातन और संस्कृति का स्वर

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- राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत हुए माँ मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर परम पूज्य डॉ. प्रेमा साई जी महाराज

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रायपुर/नई दिल्ली। बस्तर की आध्यात्मिक चेतना, जनजातीय संस्कृति, समाज सेवा एवं सनातन जागरण की तपस्वी परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवपूर्ण प्रतिष्ठा उस समय प्राप्त हुई, जब भारत निर्माण कॉन्क्लेव–2026 के गरिमामय मंच पर माँ मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर परम पूज्य डॉ. प्रेमा साई जी महाराज को उनके विलक्षण आध्यात्मिक नेतृत्व, लोककल्याण एवं राष्ट्रसेवा में दिए जा रहे अतुलनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय सम्मान अर्पित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पूज्य गुरुदेव को प्रणाम कर उनका पावन आशीर्वाद प्राप्त किया तथा श्रद्धापूर्वक राष्ट्रीय सम्मान अर्पित करते हुए उनके आध्यात्मिक एवं राष्ट्रहितकारी योगदान के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया।
यह सम्मान केवल एक संत का अभिनंदन नहीं, बल्कि बस्तर की उस तपस्या का राष्ट्रीय सम्मान है, जो वर्षों से नक्सल प्रभावित वनांचलों में सेवा, संस्कार, सनातन चेतना और जनजातीय अस्मिता के संरक्षण का अलख जगा रही है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तथा सुदर्शन न्यूज़ के सीएमडी एवं एडिटर-इन-चीफ  सुरेश चव्हाणके ने पूज्य गुरुदेव को शुभकामनाएं देते हुए उनके सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान की मुक्तकंठ से सराहना की।
कॉन्क्लेव के दौरान पूज्य गुरुदेव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, केंद्रीय वस्त्र मंत्री  गिरिराज सिंह, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा, लोकसभा सांसद मनोज तिवारी, राज्यसभा सांसद  सुधांशु त्रिवेदी तथा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन से शिष्टाचार भेंट की। उन्होंने सभी अतिथियों को माँ मातंगी दिव्य धाम की धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी दी तथा आगामी माँ कोत्रावै प्रतिमा स्थापना महोत्सव में सादर आमंत्रित किया। 
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों को माँ मातंगी दिव्य धाम की आधिकारिक पुस्तिका भी भेंट की गई।
-जब नक्सलवाद चरम पर था, तब शुरू हुआ सेवा और सनातन का अभियान ..
 पूज्य डॉ. प्रेमा साई जी महाराज ने बस्तर में उस समय सेवा, संस्कार और सनातन जागरण का अभियान प्रारंभ किया, जब नक्सलवाद अपने चरम पर था और अनेक क्षेत्र भय एवं असुरक्षा के वातावरण से घिरे हुए थे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बस्तर, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के दूरस्थ वनांचलों तक पहुँचकर जनजातीय समाज के बीच विश्वास, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव का दीप प्रज्ज्वलित किया।

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-घर वापसी अभियान से 1025 से अधिक परिवार अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े
पूज्य गुरुदेव के मार्गदर्शन में चलाए गए घर वापसी अभियान के माध्यम से अब तक 1025 से अधिक परिवार पुनः अपनी सनातन सांस्कृतिक परंपराओं और मूल धार्मिक पहचान से जुड़े हैं। यह अभियान किसी विरोध का नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपरा, पूर्वजों की विरासत और भारतीय जीवन मूल्यों से पुनः जुड़ने का अभियान बनकर उभरा है।
-दिव्य दरबार बना लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र ...
माँ मातंगी दिव्य धाम आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जनसेवा, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत केंद्र बन चुका है। बस्तर, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर सहित अनेक क्षेत्रों में आयोजित निःशुल्क त्रिकालदर्शी दिव्य दरबारों में हजारों श्रद्धालु अपनी पारिवारिक, सामाजिक और व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान तथा मानसिक शांति की तलाश में पहुँचते हैं। इन दिव्य दरबारों ने वनांचल के लोगों में नई आशा, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवन दृष्टि का संचार किया है।
-हिन्दू जगाओ शोभायात्राओं में उमड़ा ऐतिहासिक जनसैलाब ...
परम पूज्य डॉ. प्रेमा साई जी महाराज के नेतृत्व में नारायणपुर और बीजापुर में आयोजित हिन्दू जगाओ शोभायात्राएँ बस्तर के इतिहास की सबसे भव्य सांस्कृतिक यात्राओं में गिनी जाती हैं। इन शोभायात्राओं में जनजातीय समाज, युवाओं, मातृशक्ति और हजारों श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक सहभागिता देखने को मिली। पूरा बस्तर भगवा ध्वज, पारंपरिक वेशभूषा, सांस्कृतिक झाँकियों और जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। इन आयोजनों ने सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रभावशाली संदेश जन-जन तक पहुँचाया।
-सीमांत क्षेत्रों में जवानों का बढ़ाया मनोबल ...
पूज्य गुरुदेव ने नक्सल प्रभावित दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों के बीच पहुँचकर उनका सम्मान और उत्साहवर्धन किया। बस्तर के माओवादी सेंट्रल कमेटी के सबसे कठिन क्षेत्रों में शामिल एडजूम और आदेर-सिओबी तक पहुँचकर उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के वीर जवानों का सम्मान किया तथा उनके साहस, शौर्य और राष्ट्रसेवा को नमन किया।
-सेवा ही साधना का संकल्प ...
माँ मातंगी दिव्य धाम के माध्यम से वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को समय-समय पर आर्थिक सहायता, आवश्यक सामग्री और मानवीय सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही नारायणपुर स्थित एक प्राचीन मंदिर के पुनर्निर्माण में सहयोग देकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण कार्य किया गया है।

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