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बारिश के साथ दिखने लगा 'मोर गांव–मोर पानी' अभियान का असर, जल संरक्षण संरचनाएं हुईं लबालब

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दुर्ग। जिले में संचालित 'मोर गांव–मोर पानी' महाअभियान का सकारात्मक प्रभाव अब मानसून की बारिश के साथ गांव-गांव में दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में हुई अच्छी वर्षा से अभियान के तहत निर्मित आजीविका डबरियां, नवा तरिया, तालाब और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से भर रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ कृषि, सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा अन्य आजीविका गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर जल संरचनाओं का निर्माण कराया गया है। अभियान का लक्ष्य केवल वर्षा जल का संचयन नहीं, बल्कि ग्रामीण समृद्धि और स्थायी आजीविका का आधार तैयार करना है।
अभियान के तहत जिले में 30 आजीविका डबरियां तथा 'नवा तरिया–आय के जरिया' योजना के अंतर्गत 112 डबरी एवं तालाब बनाए गए हैं, जो अब वर्षा जल से लबालब भरने लगे हैं। इनसे वर्षभर सिंचाई, मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए जल उपलब्ध रहेगा।
जिले में 1 जुलाई से शुरू हुए 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (वीबीजीआरजी)' के तहत 303 जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्यों को भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। इन कार्यों का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण और ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाना है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के नेतृत्व में जिले की 300 ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी से जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता दी गई। एक ही वित्तीय वर्ष में 55,965 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, 15 परकोलेशन पॉण्ड, 834 रिचार्ज पिट, 1,324 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 9,663 सोख्ता गड्ढे, 123 ग्राम तालाब, 20,518 कंटूर ट्रेंच, 26 चेक डैम तथा 28 बोरवेल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया।
मनरेगा के माध्यम से इन कार्यों के साथ ग्रामीणों को रोजगार भी मिला है। जिले में अब तक 33 करोड़ 91 लाख 90 हजार रुपये की मजदूरी राशि श्रमिकों के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।
जिला प्रशासन का मानना है कि मानसून के दौरान जल संरचनाओं के भरने से भू-जल स्तर में सुधार, सिंचाई क्षमता में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। 'मोर गांव–मोर पानी' अभियान जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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