-कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ की बड़ी पहल; 300 ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव और मैदानी अमले को मिला विशेष प्रशिक्षण
-सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत जिला स्तर पर 'विशेष टास्क फोर्स' (समिति) गठित,
घर-घर से 4 श्रेणियों में बटेगा कचरा
दुर्ग। दुर्ग जिले को देश का सबसे स्वच्छ और आदर्श जिला बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया । जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह के कड़े निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के कुशल मार्गदर्शन में 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026' को ग्रामीण इलाकों में पूरी कड़ाई से लागू करने के लिए एक दिवसीय हाई-टेक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से किया गया ।
इस महा-अभियान में जनपद पंचायत दुर्ग, धमधा एवं पाटन की समस्त 300 ग्राम पंचायतों के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) व स्वच्छ भारत मिशन के 300 से अधिक जाबांज मैदानी अमले ने हिस्सा लेकर जमीन पर बदलाव लाने का संकल्प लिया । कार्यरत क्षेत्रीय अम्ले बीपीएम, ऐरिया कॉडिनेटर, पीआरपी, एफएल सीआरपी, कृषि सखी, पशु सखी, पोषण सखी विडियो कॉफ्रेंसिंग में उपस्थित होकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। देवीकिसन निमजे मास्टर ट्रेनर समर्थन संस्था के राज्य स्तरीय अधिकारी द्वारा रायपुर से ऑनलाईन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया।
-सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश: नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं ..
कार्यशाला में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील क्रमांक 6174/2023 में पारित कड़े आदेशों की जानकारी सीधे जनप्रतिनिधियों को दी गई । न्यायालय द्वारा दिनांक 05-05-2026 को जारी गाइडलाइंस के परिपालन में नियम पुस्तिका और आदेशों की प्रतियां हर ग्राम पंचायत को सौंप दी गई हैं, ताकि नियमों का उल्लंघन न हो सके । रायपुर से जुड़े समर्थन संस्था के राज्य स्तरीय मास्टर ने कचरा संग्रहण से लेकर उसके वैज्ञानिक निपटान की ऐसी अचूक तकनीकें सिखाईं, जिससे गांव अब शहरों से भी ज्यादा साफ नजर आएंगे ।
-जिला स्तर पर 'विशेष समिति' करेगी मॉनिटरिंग, ये 5 नियम बदलेंगे जिले की तस्वीर ..
स्वच्छ भारत मिशन के तहत कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय मानकों की 24 घंटे सख्त निगरानी के लिए जिला स्तर पर एक विशेष समिति (कमांड टीम) का गठन कर लिया गया है यह टीम निम्नलिखित 5 बड़े मोर्चों पर कड़ाई से काम करेगी।
1.सोर्स से ही पृथक्कीकरण: सूखे और गीले कचरे को घर पर ही अलग-अलग करना अब स्वैच्छिक नहीं, बल्कि अनिवार्य होगा ।
2.100% डोर-टू-डोर कलेक्शन: शहरी हो या ग्रामीण इलाका, हर एक घर से शत-प्रतिशत कचरा उठाया जाएगा ।
3.वैज्ञानिक डिस्पोजल: कचरा फेंकने के पारंपरिक और प्रदूषणकारी तरीकों को बंद कर पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाएगी ।
4.लिगेसी वेस्ट का खात्मा: जिले के पुराने डंपिंग यार्डों (कचरे के पहाड़ों) का वैज्ञानिक उपचार कर उन्हें दोबारा हरा-भरा और पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा ।
5.स्वच्छता का जन-आंदोलन: आम जनता के व्यवहार में बड़ा बदलाव लाने के लिए जिले भर में कड़ा जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ।
आम नागरिकों और ग्राम पंचायतों के लिए 'डू एंड डोंट्स' (नियम व शर्तें):
-4 श्रेणियों में कचरा बांटना अनिवार्य: अब हर घर को अपना कचरा 4 अलग-अलग डिब्बों—गीला, सूखा, सेनेटरी वेस्ट और स्पेशल केयर वेस्ट में बांटकर ही देना होगा । इस्तेमाल किए गए सेनेटरी वेस्ट को पैकेट/पाउच में लपेटकर देना अनिवार्य है ।
-सड़क या जल स्रोतों पर कचरा फेंका तो खैर नहीं: सड़कों, सार्वजनिक स्थलों या तालाबों/नदियों में कचरा फेंकने, खुले में डंप करने या उसे जलाने/दबाने पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है ।
-आयोजनों के लिए लेनी होगी अनुमति: बिना स्थानीय निकाय की पूर्व अनुमति और 3 कार्य दिवस पहले सूचना दिए, किसी भी अनधिकृत स्थान पर 100 से अधिक व्यक्तियों का कोई भी आयोजन नहीं किया जा सकेगा ।
-बल्क वेस्ट जनरेटर्स (BWG) पर शिकंजा: बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वाले संस्थानों को ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना होगा और अपने गीले कचरे के निपटान के लिए स्वयं कंपोस्टिंग या बायोमीथनेशन प्लांट लगाने होंगे
-मैदानी स्तर पर कमान संभालेंगे जनपद सीईओ
इसके पूर्व विकासखण्ड स्तर पर समस्त 300 पंचायत के सरपंच एवं सचिव का प्रशिक्षण कर पारित अधिनियम की जानकारी दी गई इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम को मैदानी स्तर पर लागू करने की रूपरेखा समझाने में रूपेश कुमार पाण्डेय (सीईओ, जनपद पंचायत दुर्ग), किरण कुमार कौशिक (सीईओ, जनपद पंचायत धमधा) एवं जागेन्द्र कुमार साहू (सीईओ, जनपद पंचायत पाटन) ने उपस्थित रहकर अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।
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