दुर्ग। दुर्ग नगर पालिक निगम इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा राजनीतिक खींचतान, अंतर्कलह और विवादों को लेकर सुर्खियों में है। निगम के भीतर जिस तरह का माहौल पिछले कुछ समय से बन रहा है, उसने शहर की राजनीति को गर्मा दिया है। निगम गलियारों से लेकर राजनीतिक चौपालों और चाय ठेलों तक अब एक ही सवाल चर्चा में है—क्या महापौर अलका बाघमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी चल रही है?
स्थिति केवल विपक्षी कांग्रेस की नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष के कई पार्षद भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। सामान्य सभा की बैठकों में पार्षदों द्वारा वार्डों की उपेक्षा, विकास कार्यों में भेदभाव और संवादहीनता जैसे आरोप लगाए जा चुके हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि निगम के भीतर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है।
-निगम में ‘पुलिस एंट्री’ से मचा हड़कंप ..
हाल ही में निगम परिसर में घटी एक घटना ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया। जानकारी के अनुसार, बिना किसी धरना-प्रदर्शन, हंगामे या विवाद की स्थिति के अचानक दो थानों के प्रभारी और सीएसपी- एडिशनल एसपी दुर्ग पुलिस बल के साथ निगम पहुंच गए। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से निगम परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
चर्चाओं के अनुसार, महापौर अलका बाघमार ने विभिन्न विभागों के कार्यपालन अभियंताओं को प्रोटोकॉल संबंधी मुद्दों पर चर्चा के लिए अपने कक्ष में बुलाया था। अधिकारी बैठक में मौजूद थे और सामान्य चर्चा चल रही थी, तभी पुलिस अधिकारियों की एंट्री ने कई सवाल खड़े कर दिए।
अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी कि बिना किसी विरोध या तनाव के पुलिस बल बुलाने की जरूरत पड़ गई? क्या निगम प्रशासन के भीतर संवाद का संकट इतना गहरा चुका है कि अधिकारियों से बातचीत के लिए भी पुलिस की मौजूदगी जरूरी समझी जाने लगी है? या फिर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच विश्वास का संकट बढ़ता जा रहा है?
-सोशल मीडिया में वायरल वीडियो बना चर्चा का विषय ..
इसी बीच सोशल मीडिया पर महापौर का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह सार्वजनिक मंच से अधिकारियों को तीखे अंदाज में प्रोटोकॉल और कार्यप्रणाली को लेकर नसीहत देती नजर आ रही हैं। विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ नेता भी इसे लेकर तंज कस रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि इसी सख्ती और सक्रियता का प्रदर्शन शहर की बुनियादी समस्याओं के समाधान में दिखाई देता, तो दुर्ग शहर की तस्वीर कुछ और होती।
-मंत्री गजेंद्र यादव की सक्रियता से बढ़ी राजनीतिक असहजता ..
दूसरी ओर प्रदेश के शिक्षा मंत्री एवं दुर्ग शहर विधायक गजेंद्र यादव लगातार शहर में विकास कार्यों को गति देने में सक्रिय नजर आ रहे हैं। शहर में हाल के वर्षों में शुरू हुए कई बड़े प्रोजेक्ट सीधे मंत्री गजेंद्र यादव की पहल से जुड़े बताए जा रहे हैं।
इनमें स्टेडियम परिसर में बैडमिंटन कोर्ट निर्माण, पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में आधुनिक स्विमिंग पूल, केनाल रोड निर्माण, जेल चौक से पुलगांव चौक तक फोरलेन सड़क परियोजना, राजेंद्र पार्क चौक का सौंदर्यीकरण, गया नगर में सांस्कृतिक भवन तथा समृद्धि बाजार में सब्जी मंडी के संधारण जैसे कार्य शामिल हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन परियोजनाओं का श्रेय सीधे मंत्री गजेंद्र यादव और उनके समर्थकों को मिल रहा है, जिससे निगम नेतृत्व असहज महसूस कर रहा है। यही वजह है कि भाजपा के भीतर भी “क्रेडिट वॉर” की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
-बुनियादी समस्याओं से जूझता शहर ..
शहर की जनता का बड़ा वर्ग अब भी मूलभूत समस्याओं से परेशान है। व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इंदिरा मार्केट की बदहाल स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। वहीं सुराना कॉलेज के सामने फैली गंदगी और बदबूदार माहौल से छात्र-छात्राएं और राहगीर परेशान हैं। इसके अलावा चर्चगेट क्षेत्र में शनिवार को लगने वाले अवैध बाजार के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निगम प्रशासन इन समस्याओं के समाधान में गंभीरता नहीं दिखा रहा।
-भाजपा संगठन तक पहुंची नाराजगी की गूंज ...
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, निगम के भीतर चल रही खींचतान और हालिया “पुलिसिया घटनाक्रम” की जानकारी अब रायपुर और दिल्ली तक भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेताओं के पास पहुंच चुकी है। सत्ता पक्ष के पार्षदों में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले समय में निगम राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।
सूत्रों का कहना है कि यदि स्थिति इसी तरह बनी रही, तो पार्षदों का असंतोष अविश्वास प्रस्ताव का रूप ले सकता है। हालांकि अभी तक किसी भी स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल दुर्ग नगर निगम की राजनीति में चल रहा यह घमासान आने वाले दिनों में और अधिक दिलचस्प मोड़ ले सकता है। अब सबकी नजर भाजपा संगठन और निगम के भीतर होने वाली अगली राजनीतिक हलचल पर टिकी हुई है।
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